तपिश बढ़ने के साथ ही लोगों के हलक भी सुखने लगे हैं, वहीं जलस्तर भी गिरने लगा है। स्थिति यह है कि जलस्तर गिरने से जगह-जगह ट्यूबवेल और हैंडपंप जवाब देने लगे हैं। वहीं जो सुचारु ट्यूबवेल हैं, उनसे मिलने वाली पानी की मात्रा में भी 20 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। इसके चलते लोगों के सामने पानी का संकट गहराने लगा है। साथ ही फसलों की सिंचाई पर भी खतरा मंडरा रहा है।
बढ़ती तपिश के चलते शहर से देहात तक ट्यूबवेल और हैंडपंपों के ठप होने का सिलसिला शुरू हो गया है। शहर के साथ ही देहात के पिरान कलियर, मंगलौर, लक्सर, खानपुर, झबरेड़ा, चुड़ियाला और भगवानपुर क्षेत्रों में जगह-जगह हैंडपंपों और ट्यूबवेलों से पानी नहीं आने की सूचनाएं मिल रही है। साथ ही जमीन के भीतर पानी का जलस्तर गिरने के चलते जो ट्यूबवेल काम कर रहे हैं उनमें भी पानी की 20 फीसदी तक कमी आ चुकी है। शहर में ही पेयजल आपूर्ति के लिए लगे 15 ट्यूबवेलों में जलस्तर गिरने के चलते पहले जितना पानी नहीं मिल पा रहा है। जल संस्थान के अधिकारियों की माने तो पहले जहां एक ट्यूबवेल से 1000 एलपीएम (लीटर पर मिनट) पानी मिल रहा था। वह अब घटकर 20 फीसदी कम यानी 800 एलपीएम रह गया है। वहीं दूसरी ओर बढ़ती गर्मी के बीच बिजली की आंखमिचौली भी शुरू हो गई है। जिससे शहर के ओवरहेड टैंकों को भरने में दिक्कतें पैदा होने लगी है। टैंक से मिलने वाले पानी में कमी और जगह-जगह हैंडपंपों के जवाब देने के चलते पानी का संकट गहरा गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जल्द ही बारिश नहीं होती है तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी खराब हो सकती है।