सिविल अस्पताल में इन दिनों महिलाओं की जांच और उपचार भगवान भरोसे है। अस्पताल में तीनों महिला चिकित्सकों की एक साथ छुट्टी से मरीजों को विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि महिला चिकित्सक के नहीं होने से मजबूरी में नर्सें ही ओपीडी संभाल रही हैं, लेकिन सिजेरियन डिलीवरी और अन्य इमरजेंसी मामलों में महिलाओं और तीमारदारों को निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही है।
शहर और आसपास के क्षेत्रों का सबसे बड़ा अस्पताल होने के कारण लक्सर, मंगलौर, कलियर, भगवानपुर से भी बड़ी संख्या में मरीज रुड़की सिविल अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन यहां भी उन्हें विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगभग 15 दिनों से यहां महिला चिकित्सकों का टोटा बना हुआ है। कारण कि तीनों महिला चिकित्सक फिलहाल अवकाश पर चल रही हैं। आकस्मिक व्यवस्था के तहत बहादराबाद में संविदा पर तैनात एक महिला चिकित्सक को 30 मई तक रुड़की सिविल अस्पताल से संबद्ध किया गया था, लेकिन इसके बाद उन्होंने भी आना बंद कर दिया। ऐसे में पिछले एक सप्ताह से महिलाओं को अस्पताल में जांच और उपचार के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में होने वाली सिजेरियन डिलीवरी भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में प्रसूताओं को निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही है, जबकि स्वास्थ्य विभाग और अधिकारियों की ओर से सरकारी अस्पतालों में अधिक से अधिक प्रसव कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके विपरीत रुड़की सिविल अस्पताल में सिजेरियन डिलेवरी नहीं हो पा रही है। नार्मल डिलीवरी में भी मामूली समस्या होने पर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया जा रहा है या फिर मरीजों को निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही है। यही नहीं अस्पताल की महिला ओपीडी भी फिलहाल नर्सों के भरोसे चल रही है। यह स्थिति तब है कि जबकि समस्या स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से लेकर प्रशासन और शासन के संज्ञान में हैं, लेकिन समाधान के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।