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द दून स्कूल को लेकर उलझन में अधिकारी

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ब्यूरो/अमर उजाला।
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देहरादून। द दून स्कूल की एनओसी को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी उलझन में हैं। स्कूल ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर अपने यहां इंटरनेशनल बोर्ड लागू होने की बात कही है। वहीं, शिक्षा विभाग के एक्ट के अनुसार उत्तराखंड बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के विद्यालयों को विभाग से एनओसी लेना जरूरी है। अन्य बोर्ड को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
प्रतिष्ठित द दून स्कूल के पास शिक्षा विभाग की एनओसी न होने के मामले में विभागीय अधिकारी बृहस्पतिवार को माथापच्ची करते रहे। सचिव विद्यालयी शिक्षा आर. मीनाक्षी सुुंदरम ने मुख्य शिक्षा अधिकारी आशा रानी पैन्यूली को स्कूल से संबंधित पत्रावलियों के साथ तलब किया। इससे पहले जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक यशवंत सिंह चौधरी ने स्कूल से संबंधित पत्रावलियों का अध्ययन किया।
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सूत्रों के अनुसार द दून स्कूल ने पूर्व में जो दस्तावेज शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराए हैं। उनमें इंटरनेशनल बैकलॉरेट ऑर्गेनाइजेशन (आईबीओ) और द कैंब्रिज एसेसमेंट इंटरनेशनल एजूकेशन (कैंब्रिज इंटरनेशनल एग्जामिनेशन) से संबद्ध होने की जानकारी दी है। इसके अलावा वह इंटरनेशनल जनरल सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन से भी संबद्ध हैं।
सचिव विद्यालयी शिक्षा आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि दून स्कूल में संचालित अंतरराष्ट्रीय बोर्ड के लिए राज्य सरकार के स्तर से एनओसी की जरूरत नहीं है। आरटीई के तहत कई शर्तेें और प्रावधान हैं। लेकिन, उनमें से ज्यादातर उन स्कूलों पर लागू होते हैं, जो पहली कक्षा से शुरू होते हैं। लेकिन, द दून स्कूल सातवीं कक्षा से शुरू होता है, ऐसे में उस पर यह नियम लागू नहीं होते।
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उत्तराखंड बाल अधिकार शिक्षा नियमावली के प्रावधानों का अध्ययन किया जा रहा है। इसके अलावा अन्य नियम भी देखे जा रहे हैं। शिक्षा विभाग को उपलब्ध संसाधनों, शिक्षकों और ढांचागत सुविधाओं के आधार पर एनओसी देनी होती है। यदि दून स्कूल एनओसी के लिए आवेदन करे तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
-डा. आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव, विद्यालयी शिक्षा
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