ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
भारत दिशाहीनता के मार्ग पर बहुत आगे निकल गया है। इसमें चाहे गंगा का मामला हो या फिर कश्मीर की समस्या। गंगा को निर्मल बनाए जाने की योजनाएं ऐसी हैं जैसे कैंसर रोगी के शरीर पर चमेली का तेल लगा दिया जाए। जिस तरह चमेली के तेल से कैंसर ठीक नहीं होता, उसी प्रकार वर्तमान योजनाओं से गंगा भी निर्मल नहीं बनेगी। वहीं कश्मीर का मुद्दा सभी दलों के सहयोग से निपटाया जा सकता है।
ये बातें पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने शनिवार को जोगीवाला स्थित एक वेडिंग प्वाइंट में पत्रकारों से कहीं। उन्होंने कहा कि गंगा को मूल स्वरूप में लाने के लिए उसके सिरोभाग के स्थान उत्तराखंड से शुरूआत जरूरी है। इसके अलावा उन्होंने वर्तमान राजनीतिक उठापठक के प्रति भाजपा को सचेत रहने के भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते भाजपा संभल जाती है तो इसमें पार्टी और देश दोनों का भला है। गंगा की स्वच्छता के विषय पर शंकराचार्य ने कहा कि गंगा को निर्मल बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं रोचक तो हैं, लेकिन कारगर नहीं है। गंगा को मूल स्वरूप में लाए बिना निर्मल नहीं बनाया जा सकता है। इसके लिए यदि महज टिहरी परियोजना निरस्त कर दी जाए तो गंगा लगभग 40 फीसदी मूल स्वरूप में आ जाएगी। इसके लिए सरकारों और प्रशासनिक तंत्रों के साथ आध्यात्मिक समझ वाले लोगों का भी सहयोग लेना होगा। उन्होंने टिहरी बांध के संदर्भ में कहा कि इस समय देश में वेदों को दरकिनार करते हुए विकास किया जा रहा है। परिणामस्वरूप जब विकास के गर्भ से विस्फोट होगा तो विनाश निश्चित है।
कश्मीर की वर्तमान परिस्थिति के बारे में शंकराचार्य ने कहा कि यह काम सिर्फ वर्तमान केंद्र सरकार का ही नहीं है, बल्कि इसमें विपक्षी दलों को भी साथ देना चाहिए। पिछले दिनों एक त्योहार को आधार बनाकर जिस तरह सेना की कार्रवाई बंद की गई उसका किसी ने विरोध नहीं किया। जबकि इसी दौरान कई सैनिक शहीद हो गए। वर्तमान में ऐसा कोई दल नहीं है जो सत्ता लोलुप और दिशाहीन न हो। इसमें भाजपा भी शामिल है। हालांकि उन्होंने कुछ मुद्दों की तरफ इशारा करते हुए भाजपा को सतर्क रहने की नसीहत दी और देश के उद्धार की संभावना जताई। उन्होंने कहा कि यदि सभी दल एक हो गए तो इसमें देश का भला तो किसी दशा में नहीं होगा।
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राम मंदिर निर्माण में मांगा मुस्लिमों का साथ
शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि राम मंदिर निर्माण किसी दल का मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों सनातन धर्मियों की आस्था का प्रश्न है। इस बात को सनातन धर्मावलंबी के साथ ही मुस्लिम समाज भी जानता है। मुस्लिम समाज भी राम मंदिर और अपने इतिहास के बारे में सबकुछ जानता है। लिहाजा मुस्लिम समाज को राम मंदिर निर्माण में साथ देना चाहिए।