ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
देहरादून ऑर्थोपैडिक सोसाइटी की ओर से श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज में आयोजित 14 वें वार्षिक यूआयोकॉन के दूसरे दिन हड्डी रोग विशेषज्ञों ने रीढ़ की ट्रॉमा सर्जरी (इमरजेंसी) के दौरान अपनाई जाने वाली आधुनिक तकनीकों व सर्जरी से पूर्व दिए जाने वाले एनेस्थीसिया सहित कई मापदंडों से संबंधित अनुभव साझा किए। इस दौरान हड्डी रोग विभाग के पीजी छात्रों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
डॉक्टर प्रियंक उनियाल ने रीढ़ की सर्जरी में नए व सुरक्षित युग की शुरुआत विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने रीढ़ की सर्जरी पर चल रहे नवीन शोधों एवं एंडोस्कोपी के माध्यम से की जानी वाली सर्जरी की जानकारी दी। डॉ पंकज कंडवाल ने रीढ़ के ट्रॉमा के दौरान हड्डी रोग विशेषज्ञों द्वारा निर्णय लेने में बरती जाने वाली सूझबूझ व सावधानियों पर भी चर्चा की। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनय राय ने सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया के महत्व एवं प्रभाव को समझाया। डॉ. आरवी कालिया ने संक्रमण रोकने के तरीकों से अवगत कराया। डॉ. मुकेश त्रिपाठी ने सर्जरी के बाद होने वाले दर्द के प्रबंधन की जानकारी दी। प्रोफेसर एनके मागू ने कूल्हों के विभिन्न विकारों के उपचार में स्टैम सेल के महत्व व एसीटेब्यूलम के सरल एवं जटिल फ्रैक्चर में जोस्टिन विधि के महत्व को समझाया। डॉ. यूके साधु ने सर्जरी की सीमेंटिंग तकनीकों एवं विस्तारित ट्रोटेंन्टिनिक ओस्टियोटमी की जानकारी दी। डॉ. जे. माहेश्वरी ने एमपीएफ एल पुनर्निर्माण एवं मैनिस्काल रिपेयर के विषय में बताया। डॉ. अनु झुरानी ने एंकीलोस्ट व डिस्प्लास्टिक कूल्हों का टीएचआर समझाया। डॉ. हिमांशू कोचर ने गोल्ड प्लेटेड घुटने के प्रत्यारोपण की जानकारी वीडियो के माध्यम से साझा की। कार्यक्रम में डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. रोमेश गौड़, डॉ. रविंदर डिमरी, डॉ. डीके तनेजा, डॉ. सुधीर कपूर, डॉ. आरबी कालिया, डॉ. अनिल जुयाल, डॉ. नवनीत बडोनी एवं डॉ. प्रवीन मित्तल ने भी विचार रखे।