ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों से पलायन रोकने के लिए खेती और बागवानी में आधुनिक तकनीकी कारगर साबित होगी। बेमौसमी फूल, फल और सब्जियों के उत्पादन के लिहाज से पर्वतीय जिलों की जलवायु मुफीद है। सरकार इस दिशा में योजनाएं बना रही हैं, ताकि पढ़े लिखे युवा नौकरी के लिए पलायन करने के बजाए खेतीबाड़ी से जुड़े। बंजर खेतों को आबाद कर आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों एवं छात्रों का आह्वान किया कि वो किसानों की मदद के लिए आगे आएं।
कृषि मंत्री शनिवार को दि इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियर्स इंडिया की ओर से आयोजित फूलों एवं सब्जियों की उच्च तकनीकी खेती पर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे। दो दिवसीय सेमिनार के उद्घाटन पर कृषि मंत्री ने कहा कि देश में फलों, फूलों और सब्जियों की मांग तेजी से बढ़ी है। बढ़ती जनसंख्या और घटती कृषि एवं बागवानी से मार्केट की मांग पूरी नहीं हो पा रही है। सुबोध उनियाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। उसी के अनुरूप हॉर्टिक्लचर, फ्लोरिकल्चर की पॉलिसी तैयार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों का जलवायु फूलों, फलों और बेमौसमी सब्जियों के उत्पादन के लिए अनुकूल है। किसानों को उच्च तकनीकी की जरूरत है, जिसे अपनाकर वो परंपरागत खेती की तुलना में फल, फूल, सब्जियां, मशरूम, चाय और तेजपत्ता के उत्पादन से ही कई गुना आमदनी बढ़ा सकते हैं।
सुबोध उनियाल ने हिमाचल का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के नौजवान का उद्देश्य नौकरी नहीं बल्कि अपने उत्पादों को दिल्ली आजादपुर मंडी पहुंचाना होता है। उत्तराखंड के नौजवान भी आधुनिक तौर तरीकों से खेती एवं बागवानी से जुड़कर पलायन को रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि अकेले बद्रीनाथ धाम में ही सालाना 10 हजार टन फूलों की खपत है। इसी तरह अन्य धार्मिक स्थलों के लिए दिल्ली से फूलों की आपूर्ति होती है। उन्होंने कहा कि किसानों को उच्च तकनीकी की जानकारी देने के लिए हर न्याय पंचायत स्तर पर चौपाल लगाई जा रही हैं। कृषि एवं उद्यान अधिकारियों की ओर से एक-एक गांव गोद लिया जा रहा है।
सेमिनार संयोजक नरेंद्र सिंह ने कहा कि कृषि में बागवानी का समावेश कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। जलवायु के हिसाब से ब्रोकली, चुकंदर, लीक, चाइनीज गोभी, बोकचोई, कैलेटस, सेलरी, चेरी, टमाटर, रेड कैबेज का उत्पाद बढ़ाया जा सकता है। इस दौरान इंस्टीट्यूट के चेयरमैन रणवीर सिंह चौहान, आईआरआईसी के निदेशक पीके मिश्रा, कृषि निदेशालय के एडिशनल कमिश्नर बीएस नेगी, निपेंद्र चौहान, एके दिनकर, जेबी सिंह और नरेंद्र सिंह समेत कई लोग मौजूद थे। सेमिनार में प्रदेश के प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया।
सेमिनार के मुख्य बिंदु
- कृषि क्षेत्र में फूलों, फलों और सब्जियों को बढ़ावा दिया जाए
- ग्रामीण बुनियादी ढांचा सुधारा जाए
- बागवानी फसलों को बाजार विकसित किया जाए
- सब्जी एवं फूलों का अनुवांशिक सुधार एवं उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्धता कराई जाए
- उच्च तकनीकी के कृषि यांत्रीकरण उपलब्ध कराए जाएं
- मृदा रहित सब्जियों के उत्पादन की विधि का इस्तेमाल की जाए
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ऐसे बच सकती है जंगली जानवरों से खेती
जंगली जानवर खेतीबाड़ी के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। जानवरों के आतंक के चलते लोग खेतीबाड़ी छोड़ने को मजबूर हैं। सेमिनार में विशेषज्ञों ने कहा कि ‘एक गांव एक फार्म’ से सामूहिक खेती हो सकती है, जिससे जंगली जानवराें से फसलों को बचाया जा सकता है। जिन इलाकों में जानवरों का ज्यादा आतंक है वहां लेमन ग्रास, हल्दी, अदरक की खेती हो सकती है।