ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय के सीड प्रभाग की विशेषज्ञ समिति ने सोमवार को हिमालयन एनवायरमेंटल स्टडीज एंड कंजरवेशन आर्गनाइजेशन (हैस्को) के विभन्न विभिन्न कार्यों का निरीक्षण कर उनका मूल्यांकन किया। समिति ने निर्णय लिया कि हैस्को भविष्य में गांवों के साथ जल केंद्रित, जैव आर्थिकी, ग्रामीण संपर्क और सौर ऊर्जा आधारित तकनीकी पर कार्य करेगा।
समिति ने शुक्लापुर गांव स्थित हैस्को केंद्र और इसके विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे कार्यों को देखा। इसमें मुख्य रूप से हैस्को गांव में चल रहे विभिन्न प्रयोगों और शोध कार्यों पर चर्चा की गई। सहसपुर, कारबारी, चकराता क्षेत्र, सहस्रधारा, चमोली में चल रहे कार्यों का भी समिति ने अध्ययन किया और हैस्को के कार्यों को सराहा। समिति सदस्यों ने सहसपुर में उन्नत घराट, कारबारी में मशरूम उत्पादन केंद्र और चकराता क्षेत्र के गांव रिखाड़, पुरोड़ी में हैस्को के कार्यों को देखा। विशेषज्ञों ने हैस्को की तकनीकी से ग्रामीणों को होने वाले लाभों पर चर्चा की। मुख्य रूप से गांव के विकास में विशेषज्ञों ने अपनी सहमति जताई। चकराता में हैस्को के कार्यों को सराहते हुए समिति ने सुझाव दिया कि इस तरह के प्रयोग दोबारा होने चाहिए। पद्मश्री डॉ.अनिल जोशी ने कहा कि हैस्को देश के उन 25 संगठनों में से एक है, जिन्हें मंत्रालय कोर सहायता देता है। यह सहायता वैज्ञानिकों और उनके प्रयोगों को आगे बढ़ाने के लिए दी जाती है।
--
ये रहे टीम शामिल
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.सुनील अग्रवाल, आईआईएससी बंगलूरू के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर एच. चाणक्य, बीएआईएफ. दिल्ली के उपाध्यक्ष डॉ.रमेश रावल, डॉ.नीलू गेरा, पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी देहरादून की डॉ. नीलू ज्योति आहुजा, डब्ल्यूडब्ल्यूआई देहरादून की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.रुचि बडोला, जीबी पंत इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन इनवॉयरमेंट एंड डेवलपमेंट के डॉ.आरके मैखुरी शामिल रहे।