भूमि न मिलने से रुका एम्स का विस्तारीकरण
-- 200 एकड़ अतिरिक्त भूमि की मांग कर रहा है एम्स
-- प्रस्ताव भेजने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकार ने नहीं दिखाई दिलचस्पी
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश परियोजना के विस्तारीकरण के लिए डबल इंजन की सरकार में भी भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिसके चलते संस्थान का विस्तारीकरण नहीं हो पा रहा है। एम्स प्रशासन परियोजना को पूर्णरूप से धरातल पर उतारने के लिए सरकार से 200 एकड़ अतिरिक्त भूमि की मांग कर रहा है। राज्य सरकार से संस्थान की स्थापना के लिए अभी तक महज 101 एकड़ भूमि ही मिल पाई है, जिसके चलते एम्स परियोजना के तहत प्रस्तावित कई प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं उतर पा रहे हैं।
करीब एक हजार करोड़ की प्रारंभिक लागत वाली एम्स परियोजना की शिला 300 एकड़ भूमि की मांग के सापेक्ष 101 एकड़ भूमि पर 2004 में रखी गई थी। इसका निर्माण कार्य 2008-09 में शुरू हो पाया। बावजूद इसके दशक भर से अधिक समय बीतने के बाद भी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्थानीय शाखा को संपूर्ण परियोजना के लिए मांग के अनुरूप पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई है, जिससे एम्स का विस्तार नहीं हो पा रहा है।
इस मामले में तब से अब तक की केंद्र और राज्य सरकारों का रवैया लगभग एक ही जैसा है। यहां तक कि केंद्र व राज्य में भाजपा की डबल इंजन की सरकार बनने के बाद भी इस दिशा में कोई सकारात्मक प्रगति नहीं हो पाई है। इस दिशा में राज्य सरकार तो उदासीन बनी ही है, केंद्र भी एम्स परियोजना को लेकर गंभीर नहीं है। वजह एम्स प्रशासन पूर्व में केंद्र सरकार को भेजे गए भूमि संबंधी प्रस्तावों में आईडीपीएल की खाली पड़ी भूमि की डिमांड कर चुका है। मगर सरकार उक्त भूमि पर अतिक्रमण तो होने देना चाहती है एम्स परियोजना के लिए नहीं देना चाहती।
भूमि नहीं मिलने से इन संस्थानों का निर्माण लटका
ऋषिकेश। एम्स प्रशासन संस्थान के विस्तारीकरण के लिए 200 एकड़ भूमि की मांग कर रहा है। उस पर कई अहम संस्थानों का निर्माण होना है। जिनके बनने के बाद ही संस्थान अपने पूर्ण स्वरूप में आ पाएगा। इनमें कैंसर केंद्र, वेलनेस क्लीनिक, कॉर्डियक सेंटर, किडनी सेंटर, लीवर सेंटर, न्यूरो सेंटर, ट्रांसप्लांट सेंटर, फेफड़ा केंद्र, इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल सेंटर, नर्सेस हॉस्टल, एडवांस आई सेंटर, इंस्टीट्यूट ऑफ ओमेन वेलफेयर सेंटर, तीमारदारों के लिए रैन बसेरा, टाइप 6 व 7 क्वार्टर, स्टाफ क्वार्टर, पार्किंग, होव्बी सेंटर, पुलिस चौकी, फायर चौकी आदि कई महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।
पांच साल में भेजे गए डेढ़ दर्जन प्रस्ताव
ऋषिकेश। एम्स संस्थान में निदेशक की नियुक्ति के बाद यानि वर्ष 2012 से अब तक केंद्र और राज्य सरकार को संस्थान के विस्तारीकरण के लिए करीब दर्जन भर प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। इस लिहाज से हर साल औसतन दो से तीन प्रस्ताव व मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव स्तर पर कई बैठकें की जा चुकी हैं, मगर नतीजा सिफर रहा। संस्थान ने अतिरिक्त भूमि के लिए केंद्र सरकार को सबसे पहले अगस्त-2012 में प्रस्ताव भेजा था, इसके बाद नवंबर व दिसंबर-12, अप्रैल-13, मई व सितंबर-14, जनवरी व अगस्त-15, जनवरी, मई व अगस्त -16, अप्रैल, मई, जून, अगस्त व अक्टूबर -2017 में केंद्र और राज्य सरकार को भूमि संबंधी प्रस्ताव भेजे गए।
कोट्स
संस्थान को संपूर्ण परियोजना के लिए 200 एकड़ भूमि की जरूरत है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार को लगातार रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं। जिसमें केंद्र सरकार से खासतौर पर आईडीपीएल की खाली पड़ी भूमि की मांग की गई है।
- प्रोफेसर डा. रवि कांत, निदेशक एम्स ऋषिकेश।
एम्स के विस्तारीकरण के लिए जल्द राज्य के मुख्य सचिव के साथ बैठक की जाएगी। जिसमें भूमि संबंधी लंबित प्रकरण पर खासतौर पर चर्चा होनी है।
हरीश थपलियाल, जनसंपर्क अधिकारी एम्स।