जीवन में पद का मद ही पतन का कारण : आचार्य उनियाल
ब्यूरो/अमर उजाल/ऋषिकेश।
कथावाचक आचार्य देवेंद्र उनियाल ने कहा कि द्वेष भाव से किया यज्ञ कभी सफल नहीं होता। पद का मद जीव के लिए अकल्याणकारी होता है और पतन का कारण बनता है। लिहाजा जीव को कभी किसी से द्वेष भाव नहीं रखना चाहिए।
तपोवन के घुघताणी गांव में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन बुधवार को प्रवचन के दौरान कथाव्यास आचार्य देवेंद्र उनियाल ने माता सती के दिव्य चरित्र की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में कभी अभिमान नहीं करना चाहिए। राजा दक्ष प्रजापति ने पद के अभिमान में द्वेषपूर्ण यज्ञ किया, जो सफल नहीं हो पाया। जिस कारण पति शंकर भगवान का अपमान देखकर मां सती ने अपनी देह त्याग दी। कथा के दौरान उप प्रधान मंजू भंडारी, सामाजिक कार्यकर्ता भाग सिंह भंडारी, आचार्य मणिराम पैन्यूली, हिमांशु कंडवाल, महेंद्र उनियाल, अमित नैथानी, मनीष बलोदी, खुशीराम उनियाल, दिनेश कोठारी, ऋषिराम भट्ट, गोपाल चौहान, मकान सिंह भंडारी, सत्यपाल पयाल, गजे सिंह आदि मौजूद रहे।