अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
केंद्र और मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बजाने के संकल्प के साथ भारतीय किसान यूनियन (अंबावत) का तीन दिवसीय सम्मेलन सोमवार को संपन्न हो गया। किसान नेताओं ने मोदी सरकार को किसान विरोधी बताते हुए जमकर कोसा और मध्यप्रदेश में पुलिस की गोलीबारी में मारे गए किसानों के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ने का संकल्प दोहराया। मध्य प्रदेश के मंदसौर में गोलीबारी में मारे गए किसानों को शहीद का दर्जा देने की मांग की है।
रोड़ीबेलवाला के मैदान में चल रहे शिविर के अंतिम दिन किसानों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी ऋषिपाल अम्बावत ने कहा है कि केंद्र सरकार स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू कर पूरे देश के किसानों के कर्जे माफ करे और मध्य प्रदेश में जिन पुलिसवालों ने किसानों पर गोली चलायी उन पर तुरन्त प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाए। मृतक किसानों को शहीद का दर्ज देकर उनके परिवार को सुविधाएं दी जाएं।
उन्होंने कहा कि गंगा तट पर संपन्न हुए इस किसान सम्मेलन में मोदी सरकार के पतन की पृष्ठभूमि तैयार हो गई। उन्होंने कहा कि पूरे देश का किसान अब केंद्र सरकार से एक-एक वादे का हिसाब लेगा। 16 प्रदेशों से आए किसानों से एकजुटता का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि 2019 में किसी उद्योगपति की नहीं किसान के बेटे की सरकार बनेगी। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव ने कहा कि भाजपा देश, धर्म, संस्कृति और किसान सभी की विरोधी है। मोदी ने यूपी में सरकार बनते ही 15 दिन के अंदर किसानों की कर्जमाफी का वादा किया था, लेकिन सभी वादे झूठे निकले।
उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष आरके त्यागी ने केंद्र और राज्य सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तराखंड में पहले से ही कृषि क्षेत्रफल कम था और राज्य बनने के बाद कृषि भूमि पर उद्योग स्थापित कर कृषि और कृषक दोनों को समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में किसानों का अपने अस्तित्व की लड़ाई स्वयं लड़नी होगी। सम्मेलन को पूर्व सांसद रामनिहोर राकेश, शमशेर सिंह दहिया, प्रवीण चौधरी अम्बावता, वीरेन्द्र राय, पहल सिंह पंवार, बलविंद्र सिंह बाजवा, आरके त्यागी, स्वामी इंद्र सिंह, दर्शन सिंह कालो, राजकुमार पांडेय, लालबहादुर यादव, ललित त्यागी, रवि पटेल, चौ. रामपाल अम्बावत, आशा तिवारी, डा. पल्लवी राज सक्सेना, पुष्पा धनकड़, जसप्रीत, सतनाम ने भी संबोधित किया।