उत्तराखंड के सीएम ने जहां हजारों संविदा कर्मियों को नियमित किया, वहीं उपनल ने 14 संविदा कर्मचारियों की रोजी-रोटी छीन ली।
आवाज उठाने की सजा
उन्हें हक के लिए आवाज उठाने की सजा मिली है। ये संविदा कर्मी पिछले बारह सालों से ओएनजीसी को अपनी सेवाएं दे रहे थे। बेरोजगार हो चुके इन कर्मचारियों ने अब सरकार से मदद की गुहार लगाई है। ओएनजीसी में 1996 और इसके बाद उत्तर प्रदेश भूतपूर्व सैनिक कल्याण निगम की ओर से सुरक्षाकर्मियों की संविदा पर नियुक्ति की गई थी।
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इन कर्मियों ने नियमितीकरण के लिए वर्ष 2006 में हाईकोर्ट में अपील की थी, जहां से मामला केंद्रीय श्रम मंत्रालय के अधीनस्थ ट्रिब्यूनल कोर्ट में विचाराधीन है। इस बीच उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) का गठन होने के बाद सभी कर्मचारी इसके अधीन हो गए।
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कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि ट्रिब्यूनल का फैसला आने से पहले ही उपनल ने उनकी सेवा समाप्ति का पत्र भेज दिया। इस पत्र में साफ लिखा गया है कि कोर्ट केस वापस न लेने पर सभी सुरक्षाकर्मियों की सेवा तत्काल समाप्त की जा रही है।
इनकी गई नौकरी
यह पत्र क्षेत्रीय परियोजना अधिकारी कैप्टन रि. डीएस थापा की ओर से भेजा गया है। सुरक्षाकर्मी इंदल सिंह यादव, मनोज जुगरान, विनोद कुकरेती, सुमित कुमार, अमर सिंह, जगदंबा प्रसाद, मन बहादुर, दुर्लभ गुरुंग, नंद बहादुर, मनोधर प्रसाद, रूप कुमार, गुलाब सिंह, सत्येंद्र नेगी और दीपक कुमार ने कहा कि अचानक नौकरी चले जाने से उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। वे इस संबंध में मुख्यमंत्री को भी पत्र भेज चुके हैं लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं किया गया।
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