ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
हजारों वर्षों से स्त्री के मन की घुटन गांठ बन गयी है, जो आज ‘मन की गेड’ के रूप में सामने आई है।
यह बातें शिक्षा अपर निदेशक शशि चौधरी ने गढ़वाली कवियत्री प्रेमलता सजवान की पुस्तक ‘मन की गेड’ के विमोचन मौके पर कहीं। उन्होंने कहा की कवियत्री ने समाज के सभी पक्षों को छूने की एक कोशिश की है। नगर निगम के सभागार में रविवार को आयोजित कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि मुख्य शिक्षा अधिकारी आशा पैन्युली ने कहा की पारस्परिक संवेदनहीनता की झलक को दर्शाती हुई यह पुस्तक हमारी समय के लोकभाषा लेखन में नया पड़ाव है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे धाद के अध्यक्ष लोकेश नवानी ने कहा की समाज की आधी आबादी महिलाओं की है। इनको ताकत दिए बिना हम बेहतर समाज की कल्पना नहीं कर सकते। पुस्तक की लेखक कवियत्री प्रेमलता सजवान ने कहा जो लड़की सुंदर सुशील और गुणवान होती है उसके मन में कई अनबुझे सवाल होते हैं। इस अवसर पर बीना कंडारी, डॉ. जयंत नवानी, डॉ. बिमल नौटियाल, हर्ष मणि व्यास, अरुण सजवान, मदन मोहन नेगी, डॉ. आशा रावत, शशि सकलानी, सुनीता, कल्पना बहुगुणा आदि मौजूद रहीं।