केंद्र सरकार ने जनवरी 2019 में आर्थिक रूप से पिछडे़ सामान्य वर्ग के लोगों को रोजगार और उच्च शिक्षण संस्थानों में दस फीसद आरक्षण देने की तो घोषणा की है। प्रदेश सरकार ने भी इसका शासनादेश जारी किया है। लेकिन, तहसील प्रशासन के पास इस संबंध में कोई आदेश नहीं पहुंचा है। जिसकी वजह से किसी भी युवा के प्रमाणपत्र नहीं बन रहे हैं। परेशान युवा कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं।
इस व्यवस्था के तहत पात्र युवक को आरक्षण संबंधी प्रमाणपत्र तहसील प्रशासन से बनवाकर आवेदन फार्म के साथ संलग्न करना होता है। उसके बाद पात्र परिवार या युवक को सरकार की इस घोषणा का लाभ मिलना है। सरकारी नौकरियों के आवेदन फार्म भी सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का प्रमाणपत्र लगाने का कॉलम दिया गया है। इस कॉलम को देखकर युवा भी प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तहसील कार्यालय पहुंच रहे हैं। लेकिन, समस्या यह है कि अब तक तहसील प्रशासन के पास इकॉनोमिकली विकर सेक्शन (इडब्लूएस) प्रमाणपत्र बनाने के आदेश ही नहीं पहुंच पाए हैं। जो भी युवा यह प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तहसील पहुंच रहे हैं उन्हें कर्मचारी वापस भेज दे रहे हैं।
इकॉनोमिकली विकर सेक्शन (इडब्लूएस) प्रमाणपत्र बनाने के लिए कोई शासनादेश नहीं मिला है। यह प्रमाणपत्र कहां बनेंगे और कौन बनाएगा हमें इसकी कोई जानकारी नहीं है।
मुकेश चंद्र गैरोला, तहसीलदार
बोले युवा
-इस समय कई सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन फॉर्म निकले हुए हैं। उनमें से कई की 24 अप्रैल आवेदन की अंतिम तिथि है। लेकिन, इडब्लूएस प्रमाणपत्र नहीं बन रहे हैं। तीसरी बार तहसील में जानकारी लेने आई हूं, लेकिन कोई कुछ बताने को तैयार ही नहीं है। - आयुषी तिवारी, छात्रा
- पहली बार आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के लोेगों के लिए आरक्षण की घोषणा की गई है। लेकिन प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। जिसकी वजह से नौकरी के लिए आवेदन करने वाले युवाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दीप्ति जोशी, छात्रा
-तहसील के कर्मचारी प्रमाणपत्र बनाने का आदेश नहीं मिलने की बात कहकर सबको लौटा दे रहे हैं। जनसुविधा केंद्रों पर भी यह प्रमाणपत्र नहीं बन रहे हैं। वह बता रहे हैं कि सॉफ्टवेयर में अभी तक इडब्लूएस प्रमाणपत्र के लिए कोई कॉलम ही नहीं बनाया है। - श्वेता, छात्रा
-नए शिक्षा सत्र के लिए दाखिले के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। कॉलेज के फार्म में भी आरक्षण का कॉलम भी बनाया गया है। जिसमें इडब्लूएस प्रमाणपत्र की संख्या भरनी होती है। लेकिन, प्रमाणपत्र नहीं बन रहे हैं। जिसकी वजह से सभी परेशान हैं। -अंजना, छात्रा