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चेतावनी बिन्दु पार कर गई गंगा

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हरिद्वार। बृहस्पतिवार की रात को पहाड़ों में हुई मूसलाधार बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ गया। शुक्रवार सुबह गंगा चेतावनी के निशान 293 मीटर को पार करते हुए 293.10 मीटर तक पहुंच गई थी। दोपहर तक जलस्तर 293.25 मीटर तक पहुंच गया था। इसके बाद धीरे-धीरे पानी कम होता गया और शाम को गंगा चेतावनी के निशान 293 मीटर पर बह रही थी।
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बृहस्पतिवार को गढ़वाल के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। बारिश के बाद रात से ही गंगा का जलस्तर बढ़ने लगा था। जानकारी के अनुसार रात के समय तो गंगा ने चेतावनी के निशान के करीब बहने लगी थी। शुक्रवार की सुबह तक गंगा का जलस्तर 293.10 मीटर और दोपहर 12 बजे तक 293.25 मीटर तक पहुंच गया। लगातार गंगा का जलस्तर बढ़ जाने से जिला प्रशासन अलर्ट हो गया। तटीय इलाकों में बसे लोगों की धड़कने बढ़ने लगी थी। प्रशासन के अधिकारियों ने तटीय इलाकों में बसे ग्रामीणों को गंगा की तरफ नहीं जाने की सलाह दी। शाम के समय जलस्तर कम होने से अधिकारियों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा कैंतुरा ने बताया कि पहाड़ों में शुक्रवार को बारिश थमने के बाद गंगा का जलस्तर कम होने लगा था लेकिन गंगा अभी भी चेतावनी के निशान के पास बह रही है।
झोपडिय़ों में भरा गंगा का पानी, सामान हुआ खराब
गंगा का जलस्तर बढ़ने से सप्तसरोवर क्षेत्र में आबादी हुई बस्ति में पानी भर गया। बस्ती में पानी भरने से लोगों में अफरा-तफरी मच गई। लोग झोपड़ियों को छोड़कर तटबंध पर पहुंच गए। गंगा का पानी कम होने के बाद बस्ति से पानी उतर गया और लोग अपने झोपड़ियों में लौट आए।
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पथरी रोह के पास रपटा बहा
पथरी। गांव सुखरासा के निकट पथरी रोह नदी पर क्षतिग्रस्त पुल के पास बना अस्थायी रपटा पानी के तेज बहाव में बह गया है। इसके अलावा एकड़ व पथरी के बीच रेलवे लाइन के अंडरग्राउंड पास में भी पानी भर गया। अंडरपास में पानी भरने से लोगों को लंबी दूरी तय कर आवागमन करना पड़ा। पिछले दो साल से पथरी रोह नदी का पुल क्षतिग्रस्त है। पुल कमजोर व जर्जर हालत में होने से कभी भी ढह सकता है। तब से इस पुल से आवागमन बंद है। यहां आवागमन के लिए अस्थायी रपटा बनाया गया था। सुखरासा के ग्रामीणों के खेत पथरी रोह नदी के उस पार हैं। ग्रामीण शरीफ, हनीफ, मुबारक, सुलेमान, रमेश, सुरेश, नरेंद्र, विक्रम आदि का कहना है कि पथरी रोह नदी में अत्यधिक पानी होने से वह खेतों में नहीं जा रहे है। जिससे पशुओं के लिए चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है।
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