डॉक्टरों की लापरवाही से फेल हो रही नसबंदी
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। साल दर साल तेजी से बढ़ रही जनसंख्या से चिंतित केंद्र सरकार जहां इसे नियंत्रित करने को लेकर तमाम योजनाएं संचालित कर रही हैं, वहीं देवभूमि के डॉक्टरों की लापरवाही से सरकारी अस्पतालों में कराई जा रही नसबंदी फेल होने के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। आलम यह है कि नसबंदी फेल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग को न सिर्फ नसबंदी कराने वाली महिलाओं को मुआवजा देना पड़ रहा है, वरन इससे विभाग में तैनात डॉक्टराें की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य निदेशालय के ही आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल 2013 से लेकर दिसंबर 2017 के बीच पूरे राज्य में नसबंदी फेल होने के 698 मामले सामने आए हैं। नसबंदी के दौरान जहां दो महिलाओं की मौत हो गई, वहीं नसबंदी फेल होने के बाद 601 महिलाओं पुरुषों ने स्वास्थ्य विभाग से मुआवजे की मांग कर दी। आंकड़ों पर नजर डालें तो 698 नसबंदी फेल होने के मामले में 198 महिलाओं व पुरुषों को जहां परिवार नियोजन इंडिमिनिटी योजना के तहत भुगतान करना पड़ा। वहीं 186 मामले स्वास्थ्य निदेशालय स्तर पर लंबित हैं। जबकि नसबंदी फेल होने के 100 मामलों को स्वास्थ्य निदेशालय ने अपने स्तर से ही निरस्त कर दिया। 117 मामलों में नए सिरे से जांच की जा रही है कि महिलाओं व पुरुषाें को मुआवजा देने का दावा बनता है या नही? सवाल उठता है कि आखिर परिवार नियोजन को लेकर नसबंदी कराने वाली महिलाओं व पुरुषों की नसबंदी किन कारणों से फेल हो रही है। इतने अधिक प्रकरण सामने आने के बाद संबंधित डॉक्टरों पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई।
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80663 महिलाओं व 3393 पुरुषों ने करायी नसबंदी
आंकड़ों के मुताबिक 2013-14 से लेकर 2017-18 के बीच 80663 महिलाओं व 3393 पुरुषों ने नसबंदी कराई। नसबंदी को लेकर राज्य की स्थिति को बहुत अच्छा नही कहा जा सकता है।
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आखिर कितने मुआवजे का है प्रावधान?
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक परिवार नियोजन के दौरान या उपरांत होने वाली मौत व असफल आपरेशन के बाद केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक ‘परिवार नियोजन इंडिमिनिटी योजना’ के तहत पीड़ित को मुआवजा देने का प्रावधान है। प्रावधानों के तहत नसबंदी कराने के सात दिनों के भीतर यदि महिला या पुरुष की मौत हो जाती है तो परिजनों को दो लाख रुपये मुआवजा दिया जाना चाहिए। यदि नसबंदी कराने के बाद 8 से लेकर 30 दिन के भीतर मौत होती है तो परिजनों को 50000 रुपये का मुआवजा और नसबंदी फेल होने की स्थिति में 30000 का मुआवजा देने का प्रावधान है।