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यहां बिना ‘सुविधा शुल्क’ के नहीं होता काम

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यहां बिना ‘सुविधा शुल्क’ के नहीं होता काम
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
तमाम दावों के बावजूद कर्मचारियों और अधिकारियों की लापरवाही से सरकार की कल्याणकारी योजनाएं परवान नहीं चढ़ पा रही हैं। सिस्टम की जड़ तक जम चुके भ्रष्टाचार के कारण जरूरतमंदों को इन योजनाओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसकी बानगी सदर तहसील और जिला समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में देखी जा सकती है। इससे सरकार के जीरो टालरेंस के दावों की भी पोल खुल रही है। सब कुछ जानते हुए भी अधिकारी अनजान बनने का नाटक कर रहे हैं।
काफी दिनों से एक हजार रुपये की पेंशन पाने के लिए तहसील में सत्यापन कराने पहुंच रहे लोगों को फजीहत झेलकर भी निराश ही वापस लौटना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि तहसील में बिना सुविधा शुल्क के कोई काम नहीं हो रहा है। कर्मचारी यहां सक्रिय दलालों के माध्यम से काम कर रहे हैं। मंगलवार को भी चार मंजिल चढ़कर पेंशन का सत्यापन कराने तहसील पहुंचे दिव्यांगों, विधवाओं और वृद्धों दिनभर के इंतजार के बाद निराश ही घर लौटना पड़ा। कांवली, खुड़बुड़ा मोहल्ला, जटिया मोहल्ला, मच्छी बाजार, इंद्रेश नगर सहित तहसील के अन्य क्षेत्रों के पहुंचे लोग सुबह नौ बजे से खुड़बुड़ा के पटवारी विजय सिंह के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन दोपहर बाद तीन बजे तक भी पटवारी के न आने पर पेंशनरों के सब्र का बांध टूट गया। आक्रोशित पेंशनरों में तहसीलदार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
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उन्होंने कहा कि सारे काम छोड़कर सुबह से भूखे-प्यासे सत्यापन कराने के लिए आए हैं लेकिन पटवारी और तहसीलदार गायब हैं। उन्होंने कहा कि वे कल सत्यापन कराने के लिए आए थे। उस समय मंगलवार को पटवारी के आने का समय दिया गया था, लेकिन वह आज भी नहीं आए। आरोप है कि अवैध वसूली के लिए समाज कल्याण विभाग के कर्मचारी और अधिकारी सत्यापन के नाम पर उन्हें परेशान कर रहे है। उन्होंने बताया कि इंतजार के दौरान दोपहर में एक वृद्ध महिला बेहोश हो गई। जिसे काफी देर बाद होश आया।
इसके अलावा काफी दिनों से खराब पड़ी लिफ्ट भी ठीक नहीं की सकी है। जिससे बीमार वृद्धों और दिव्यांगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 27 मई के अंक में अमर उजाला ने इस बड़ी समस्या को प्रमुखता से उठाया था लेकिन अधिकारियों की लापरवाही का आलम से है कि यह लिफ्ट भी आज तक ठीक नहीं हो सकी है।

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बोले पीड़ित ...
सुबह नौ बजे से भूखे-प्यासे पटवारी के आने का इंतजार कर रही हूं। पूछने पर बार-बार ये कह दिया जाता है कि 10 मिनट में आ रहे हैं। तीन बज गए लेकिन अभी तक पटवारी नहीं आया। अब यहां बताया जा रहा है कि पटवारी कोर्ट गए हैं।
- कलाछौर (वृद्धा), निवासी लक्ष्मण चौक
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दो दिनों से सत्यापन कराने के लिए तहसील के चक्कर काट रही हूं। अकेले चलने में समर्थ नहीं हूं। बेटी का सहारा लेकर सोमवार को भी सत्यापन के लिए आई थी तो यह कहकर लौटा दिया था कि मंगलवार को आना। बड़ी मुश्किल से आज आई हूं तो पटवारी गायब है। यहां पर दो महिलाएं बैठा रखी हैं, जो सत्यापन कराने के नाम पर 100 रुपये ले रही हैं। इन महिलाओं से पटवारी भी मिले हुए हैं।
- राजदुलारी (वृद्धा), निवासी मच्छी बाजार
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पेंशन सत्यापन के नाम पर यहां वसूली की जा रही है। दो महिलाएं तहसील में आकर बैठ जाती हैं और हस्ताक्षर करने के लिए 100 रुपये लेकर फार्म जमा करा रही हैं। उनके बाद फार्म पर पटवारी से हस्ताक्षर कराकर दे रही हैं। एक हफ्ते से सत्यापन कराने के लिए आ रहा हूं लेकिन पटवारी के न मिलने के कारण हर बार वापस निराश लौटना पड़ रहा है।
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- अहमद (दिव्यांग) निवासी कांवली रोड
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सत्यापन के नाम पर परेशान किया जा रहा है। दो दिनों से सत्यापन के लिए आ रहा हूं लेकिन पटवारी न मिलने के कारण वापस लौटना पड़ रहा है। सीढ़ियां चढ़ने में काफी परेशानी हो रही है। विभाग के अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी अंजान बनने का नाटक कर रहे है। अधिकारियों की शह पर ही अवैध वसूली हो रही है।
- घनश्याम (दिव्यांग), निवासी खुड़बुड़ा

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कोट्स
घर-घर जाकर सत्यापन होना चाहिए लेकिन पटवारी तहसील में बैठकर ही सत्यापन कर रहे हैं जो गलत है। वसूली के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।
- अनुराग शंखधर, समाज कल्याण अधिकारी
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ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, अगर कोई शिकायत आती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
- प्रत्युष सिंह, एसडीएम, सदर
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