ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
एमकेपी पीजी कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. इंदु सिंह की कॉलेज में वापसी हो गई है। उन्हें रिटायरमेंट के बाद सत्रांत लाभ से रोकते हुए, जिलाधिकारी ने यह कहकर पद से हटा दिया था कि इससे छात्रों का कोई नुकसान नहीं होगा। मामले में हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी के आदेश पर रोक लगाते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। अब कॉलेज में डॉ. इंदु बतौर प्राचार्य एवं शिक्षिका सत्रांत लाभ के तहत ज्वाइन करेंगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने एक पुरानी याचिका पर सुनवाई करते हुए डॉ. इंदु सिंह को वित्तीय शक्तियां भी प्रदान कर दी हैं।
डॉ. इंदु सिंह का एमकेपी पीजी कॉलेज में 19 अक्तूबर 2017 को कार्यकाल पूरा हो गया था। चूंकि सत्र चल रहा था, इसलिए डॉ. सिंह ने सत्रांत लाभ के लिए रिटायरमेंट से पहले आवेदन किया था। जिलाधिकारी ने इस आवेदन पर कोई कार्रवाई तो नहीं की। फलस्वरूप डॉ. इंदु सिंह 13 अक्तूबर 2017 को हाईकोर्ट चली गई। हाईकोर्ट ने स्टे कर दिया था कि अभी डॉ. इंदु सिंह अपने पद पर बनी रहेंगी। हाईकोर्ट ने नवंबर 2017 में आदेश दिया कि जिलाधिकारी देखें कि चूंकि सत्रांत लाभ छात्राओं की पढ़ाई का नुकसान न होने से बचाने को दिया जाता है। अगर डॉ. इंदु सिंह अध्यापन कराती हैं तो वह पद पर जून 2018 तक बनी रहेंगी और उन्हें सत्रांत लाभ दिया जाएगा।
इस पर जिलाधिकारी ने हाईकोर्ट से समय मांगा। इसके बाद डीएम हाईकोर्ट में जवाब दाखिल किया कि ऐसा प्रमाणित भी नहीं हुआ कि वह कक्षाएं प्रॉपर लेती हैं। कॉलेज में दो शिक्षिकाएं हैं, इसलिए उनकी आवश्यकता नहीं है। इसके बाद जिलाधिकारी ने फरवरी 2018 में डॉ. किरन सूद को प्रिंसिपल का चार्ज दे दिया। इससे पहले डॉ. इंदु सिंह के वित्तीय अधिकार भी आठ दिसंबर 2017 को जिलाधिकारी ने ले लिए थे। डॉ. इंदु सिंह की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी के आदेश स्थगित कर दिए हैं। इसलिए बतौर प्रिंसिपल एवं शिक्षिका डॉ. इंदु सिंह कॉलेज में ज्वाइन करेंगी। साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। उधर, मामले में डॉ. इंदु सिंह ने जिलाधिकारी को आदेश की कॉपी के साथ ज्वाइन करवाने के लिए पत्र भेजा, लेकिन अभी तक जिलाधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की है। डॉ. इंदु सिंह ने बताया कि वह जून 2018 में सत्र खत्म होने तक कॉलेज में सत्रांत लाभ के तहत कार्य करेंगी।