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अर्चित अग्रवाल को जीवाईटीआई अवार्ड

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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) के छात्र अर्चित अग्रवाल को गांधीयन यंग टेकभनोलॉजिकल इनोवेशन अवार्ड (जीवाईटीआई) 2018 के लिए चुना गया है। उन्हें यह सम्मान राष्ट्रपति भवन में 19 मार्च को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में दिया जाएगा। अर्चित को यह सम्मान ऑन बोर्ड डाइग्नोस्टिक डाटा एनालिसिस सिस्टम (ओबीडीएएस) प्रोजेक्ट बनाने के लिए दिया जाएगा। अर्चित की इस कामयाबी पर विवि में खुशी की लहर है।
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यूपीईएस के बीटेक चौथे वर्ष के छात्र अर्चित ने ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जो कि वाहन की दुर्घटना होने पर बेहद लाभकारी होगा। ओबीडीएएस सिस्टम की डिवाइस कार में लगाई जाएगी। यह ऐसी डिवाइस होगी जिसका इस्तेमाल ऑटोमोबाइल कंपनियां विभिन्न क्षेत्रों में कर सकती हैं। इसके इस्तेमाल से कार का रियल टाइम डाटा प्राप्त किया जा सकता है। इसी प्रकार, बीमा कंपनियां भी कार की दुर्घटना होने की स्थिति में रियल टाइम की हिस्ट्री पता कर सकती हें। कार का एक्सीडेंट होने पर सीधे एक सूचना इमरजेंसी के अलावा पुलिस को भी चली जाएगी, जिसमें कार की सही लोकेशन भी जाएगी। कार को चोरी से बचाने के नजरिए से भी इसे सर्विलांस करना आसान होगा। अर्चित ने अपने इस प्रोजेक्ट का पेटेंट को आवेदन किया है। यूपीईएस के निदेशक मीडिया अफेयर्स अरुण ढांड ने बताया कि यह अवार्ड सोसाइटी फॉर रिसर्च एंड इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबल टेकभनोलॉजीज एंड इंस्टीट्यूट्स की ओर से दिया जा रहा है। अर्चित को यह अवार्ड पद्मभूषण डॉ. आरए माशेल्कर की ओर से दिया जाएगा। विवि के कुलपति डॉ. कमल बंसल ने बताया कि यह अवार्ड इसलिए भी खास है क्योंकि देश के 539 कॉलेजों और 212 विश्वविद्यालयों के 12,780 प्रोजेक्ट में यह अर्चित का यह प्रोजेक्ट चुना गया है। अर्चित ने यह प्रोजेक्ट एचओडी डॉ. सुशाभान चौधरी, डॉ. राजेश सिंह, प्रो. अनीता गहलोत के दिशा निर्देशन में तैयार किया है।
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