ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
वो जो अनपढ़ हैं चलो हैवान हैं तो ठीक है, हम पढ़े-लिखों को तो इंसान होना चाहिए... कुछ इसी अंदाज में केंद्रीय विद्यालय के शिक्षकों से रूबरू हुए शायर डॉ.नवाज देवबंदी। उन्होंने शिक्षकों को उनके साक्षर होने का अहसास कराया तो यह ताकीद भी की कि गुरु-शिष्य की परंपरा और रिश्ते की पाकीजगी को ऐसे ही कायम रखें। मौका था हाथी बड़कला स्थित केंद्रीय विद्यालय-1 में अर्थशास्त्र शिक्षकों के सेवाकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन का।
मंगलवार को शायर डॉ.नवाज देवबंदी बिल्कुल जुदा अंदाज में शिक्षकों से रूबरू हुए। इस प्रशिक्षण में नौ राज्यों और संभाग के 51 अर्थशास्त्र के शिक्षकों ने हिस्सा लिया। नवाज देवबंदी ने कहा कि आज अध्यापक और विद्यार्थी के रिश्ते में दूरियां बढ़ गई हैं। इसी कारण शिक्षक का सम्मान घट रहा है। शिक्षक समाज का दिशा-निर्देशक होता है। वह नई पीढ़ी का चरित्र निर्माता होता है। अध्यापकों का छात्रों से रिश्ता आत्मीय और नि:स्वार्थ भाव वाला होना चाहिए। डॉ.नवाज देवबंदी ने अनेक शायरी, मूल्यपरक और जीवन मूल्यों से परिपूर्ण गजलों से अध्यापकों को प्रेरित और प्रोत्साहित किया। इस दौरान प्राचार्य डॉ.इंद्रजीत सिंह ने स्वागत करते हुए कहा कि डॉ.नवाज की शायरी सामाजिक सरोकारों का सच्चा आइना है।
कार्यक्रम अध्यक्ष आईआईटी रुड़की के सेवानिवृत्त प्रोफेसर आरएम वासन ने कहा कि शिक्षक को शिक्षा क्षेत्र में मिशन की भावना से कार्य करना चाहिए। नई पीढ़ी को संस्कारी, जागरूक और संवेदनशील नागरिक बनाने में अध्यापकों की बड़ी भूमिका होती हैं। सहायक आयुक्त नीता खुराना ने कहा शिक्षकों को सच्चे मन से सेवा और समर्पित भाव से अध्यापन करना चाहिए। डॉ.मीरा, डॉ.योगेंद्र नारायण, मोनिका, धनेश्वर प्रसाद, अहसान, अनुराग प्रकाश ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में सह निदेशक अंजली डबराल, डॉ.एसके मिश्रा, इसरो के पूर्व प्रोफेसर कुणाल दास, डॉ.पीसी जोशी, चंद्रकांत भट्ट का विशेष सहयोग रहा।
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बेटा हीरा होता है, बेटी कोहिनूर...
देहरादून। एक आंखों के पास है, एक आंखों से दूर, बेटा हीरा होता है, बेटी कोहिनूर... डॉ.नवाज देवबंदी ने समाज में बेटे और बेटी की समानता को कुछ यूं बयां किया तो सबने तालियों से स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने ‘जब मैंने उसे खास निगाहें नाज से देखा, आइना उसने नए अंदाज से देखा, महफिल में जिसे गौर से सब देख रहे थे, देखा न उसे उसने मुझे गौर से देखा’, ‘कहानी भी हकीकत हो गई क्या, मेरे ऊपर इनायत हो गई क्या, शिकायत पर शिकायत कर रहे हो, तुम्हें मुझसे मोहब्बत हो गई क्या’, ‘जलते घर को देखने वालों फूंस का छप्पर आपका है, आपके पीछे तेज हवा है आगे मुकद्दर आपका है, उसके कत्ल पे मैं भी चुप था मेरा नंबर अब आया, मेरे कत्ल पर तुम भी चुप हो, अगला नंबर आपका है’, ‘रोशनी का कुछ न कुछ इमकान होना चाहिए, बंद कमरे में भी रोशनदान होना चाहिए, वो जो अनपढ़ हैं चलो हैवान हैं तो ठीक है, हम पढ़े लिखो को तो इंसान होना चाहिए, हिंदू-मुस्लिम चाहे जो लिखा हो माथे पर, मगर आपके सीने पे हिंदुस्तान होना चाहिए’ जैसी शायरी और गजलों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।