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‘पंवाण’ में बिखरी लोक-संस्कृति और भाषा की खुशबू

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में रविवार को आयोजित ‘पंवाण’ में कवियों ने लोक भाषा और संस्कृति से जुड़ी एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कर समां बांध दिया। पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी और प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी समेत तमाम श्रोता कविताओं के संसार में खोए रहे। पद्मश्री बसंती बिष्ट, प्रसिद्ध लोक गायक एवं कवि नरेंद्र सिंह नेगी समेत अन्य कवियों ने अपनी रचनाओं से दर्शकों की खूब तालियां बटोरी।
रपंवाण का शुभारंभ मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, विशिष्ट अतिथि प्रमुख रतूड़ी, और बलूनी ग्रुप ऑफ एजुकेशन के संरक्षक जनार्दन प्रसाद बलूनी ने संयुक्त रूप से किया। पद्मश्री बसंती बिष्ट ने मां नंदा के जागर ‘खोल्यूं का गणेशा, मोरयूं का नरैणा’ और ‘सुफल ह्वे जाया, नंदा तेरी जात’ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल के छात्र हार्दिक, ऋषिता, अलीशा, और अंजलि ने गढ़वाली कविताएं प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। इसके बाद कवियों ने गढ़वाल के लोक जीवन, साहित्य, परंपरा, संस्कृति और समाज से जुड़ी कई रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिन्हें श्रोताओं ने खूब पसंद किया।
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गढ़ कवि नरेंद्र सिंह नेगी ने ‘माया की बात छ, जरा इना सूणा धौं’ मदन डुकलान ने ‘धै-धाद-ध्वड्यूं का दिन छाया, गौं-गुठ्यार-गंवड्यूं का दिन छाया’, वीरेंद्र पंवार ने ‘सल्लि साटा हौर छनए घाटा बाठा हौर छन’, नीता कुकरेती ने ‘स्यूण धाग सिलन रैंद, जिंदगी की मुश्किल तै’, बीना बेंजवाल ने ‘सेक लय्या नि करि सकदी गिफ्ट पैक’, गिरीश सुंदरियाल ने ‘फूल बनि-बनि द्यखिनी धरति सैरी हैरी मैन’, दीपक कैंतुरा ने ‘न पैली जणू खाणु रे न लाटा’, मनोज रावत ने ‘ज्युंदा मोरयां जन वि छन’, ओम प्रकाश सेमवाल ने ‘तेरि कलम मा धार नी रईं, जरा पले दे’, ओम बधाणी ने ‘देवतों का डरायां हम मनख्यौं का धिकारियां’, जयपाल सिंह रावत ने ‘छिपडुल ब्वाल मास्टर जी साब’ ओर हरीश जुयाल ने ‘सतपुली में देखा जब तुझे पैली बार’ रचना सुनाई। मौके पर उपप्रधानाचार्य अलका राणा, उषा नेगी, गिरीश चमोली, विनोद पोखरियाल, कविलास नेगी, डॉ.एसएस राणा, राज मलिक मौजूद थे।
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गढ़वाली में भाषण देकर जीता दिल
कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी और उनकी पत्नी एवं प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी ने गढ़वाली में भाषण देकर लोगों का दिल जीत लिया। उन्होंने कहा कि राज्य की बोली-भाषा को बढ़ावा देने के लिए नियमित तौर पर ऐसे प्रयास होने चाहिए।
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