अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
शनिवार से नौ दिन चलने वाले गुप्त नवरात्र शुरू हो गए हैं। शनिश्चरी अमावस्या से शुरू होने से इन नवरात्रों का महत्व और बढ़ गया है। अमावस्या के दिन श्रद्धालु नियत घाटों पर जाकर श्राद्ध तर्पण भी करेंगे। यह अमावस्या अनेक प्रकार से पुण्यदायी बन गई है।
आषाढ़ कृष्ण अमावस्या शनिवार को सुबह आठ बजे तक रहेेगी और उसके बाद प्रतिपदा तिथि लग जाएगी। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार उदय काल में प्रतिपदा का लोप होने से पहला गुप्त नवरात्र पड़ रहा है। गुप्त नवरात्रों में तंत्र साधना, वन देवी पूजा, भैरव पूजा, योगिनी पूजा, कुब्जिका पूजा, यक्षिणी पूजा, तारा पूजा और त्रिपुर भैरवी पूजा का शास्त्रीय विधान है। यक्षणिनी साधना के समय अमावस्या युक्त शनि नवरात्र का विशेष महत्व है। यदि राहु के नक्षत्र में शुरू हो तो तंत्र शास्त्र में इसे विशिष्ठ बताया गया है। इस बार की विशेषता यह है कि गुप्त नवरात्र का प्रारंभ शनिवार से हो रहा है और अष्ठमी तिथि भी शनिवार को ही पड़ेगी। शनि और राहु दोष निवारण के लिए यह नवरात्र कारगर साबित होगा। डा. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि इन नवरात्रों में यदि प्रतिदिन भैरव मंदिर में जाकर तेल का दीपक जलाया गया और काले चनों का भोग लगाकर भैरव त्रोत कराया जाए तो राहु और शनि के प्रभाव नष्ट हो जाएंगे। शनि की ढहिया, साढ़े सती, अंर्तदशा, राहु की दशा आदि के लिए आषाढ़ पूर्णिमा तक पूजा करने से सभी प्रकार के संताप मिट जाते हैं।
शनिश्चरी अमावस्या को आषाढ़ का एक पक्ष समाप्त हो जाएगा। अब पूर्णिमा तक आषाढ़ के विभिन्न पर्व पड़ रहे है। आने वाली पूर्णिमा गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाई जाएगी। इस पूर्णिमा से ही वर्ष की सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा शुरू होगी। अमावस्या पर देश के कुछ भागों से आए श्रद्धालु गंगा स्नान भी करेंगे।