बड़कोट। 16-17 जनू 2013 की आपदा के बाद अभी तक यमुनोत्री धाम में ट्रीटमेंट तो दूर यमुना के मुहाने पर आए बड़े-बड़े बोल्डर, मलबा तक नहीं हटाया गया। वहीं खरादी में आठ गांवों को जोड़ने वाला झूला पुल भी अभी तक नहीं बन पाया है। ऐसे में लोग अभी भी आपदा के दौरान लगाई गई ट्राली से जोखिम भरी आवाजाही करने को मजबूर हैं।
बात दें कि 16-17 जून को यमुनोत्री धाम में यमुना के उद्गम स्थल पर भारी बोल्डर, मलबा आने के अलावा मंदिर के ऊपर कालिंदी पर्वत भी प्रभावित हुआ था। वहीं खरादी में यमुना नदी पर बने 8 गांवों को जोड़ने वाले झूला पुल के अलावा ठकराल पट्टी को जोड़ने वाला रवाड़ा नगाणगांव मोटर पुल की एप्रोच रोड बह जाने व पुल खतरे की जद में आया था, जिससे ठकराल धारमंडल क्षेत्र के लोग अलग-थलग पड़ गए थे। आनन-फानन में खरादी में ट्राली लगाई गई व एप्रोच रोड बनाने के साथ पुल के सुरक्षा के नाम पर दो करोड़ से अधिक खर्च किए गए, लेकिन आज भी मोटर पुल असुरक्षित होने के साथ एप्रोच रोड मलबे की ढेर में तब्दील होने से जोखिमभरी आवाजाही हो रही है। यमुनोत्री धाम को लेकर तो भूवैज्ञानिकों ने 8 जुलाई 2013 की रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि धाम में ट्रीटमेंट करवाने के साथ यमुना में आए बोल्डर हटाने आवश्यक हैं, लेकिन यह रिपोर्ट भी शासन स्तर पर धूल फांक रही है। यमुनोत्री समिति के पदाधिकारी जगमोहन उनियाल, कृतेश्वर उनियाल, बागेश्वर प्रसाद, मनमोहन उनियाल व रविंद्र चौहान, प्रदीप ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया है।
यमुनोत्री धाम में यमुना नदी के मुहाने पर आए बड़े बोल्डरों को हटाने के लिए शासन स्तर से गाइड लाइन मांगी गई है। गाइड लाइन मिलने पर ही यमुना के मुहाने में आए बोल्डरों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। खरादी में आठ गांव जोड़ने वाले पुल अभी तक तैयार नहीं हुआ यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है।
आशीष कुमार श्रीवास्तव,डीएम उत्तरकाशी।