अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
गंगा की रक्षा के लिए अनशन करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले मातृसदन के ब्रह्मचारी स्वामी निगमानंद सरस्वती को मंगलवार को उनकी छठी पुण्यतिथि पर याद किया गया। दूर-दूर से आए मातृसदन के अनुयायियों ने श्रद्धासुमन अर्पित कर दिवंगत युवा संत को याद किया तथा उनके संघर्ष को जीवंत रखते हुए हरस्तर पर गंगा की रक्षा के लिए आंदोलित रहने का संकल्प लिया।
स्वामी निगमानंद सरस्वती की पुण्यतिथि पर जगजीतपुर स्थित मातृसदन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि स्वामी निगमानंद का बलिदान बेकार नहीं गया है। युवा संत ने गंगा की रक्षा के लिए जो अनशन किया और अपने प्राणों का त्याग किया उसका ही फल है कि आज गंगा को पहले राष्ट्रीय नदी और अब जीवित मनुष्य के समान अधिकार मिले। गंगा के साथ छेड़छाड़ करने वालों को सात साल की सजा और जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया। हालांकि खनन से गंगा को मुक्ति नहीं मिल पाई है, लेकिन इसके लिए भी मातृसदन सदैव संघर्ष जारी रखेगा। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि सरकारी सिस्टम ने माफिया के इशारे पर स्वामी निगमानंद की हत्या इसलिए की थी कि इससे मातृसदन टूट जाएगा तथा इनका आंदोलन कमजोर पड़ जाएगा, लेकिन मातृसदन अपने ब्रह्मचारी के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देगा। गंगा के हित की लड़ाई और भी ज्यादा मुस्तैदी से लड़ी जा रही है
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने युवाओं से स्वामी निगमांनद को अपना आदर्श मानकर गंगा के हितों की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया। इस दौरान ब्रह्मचारी दयानंद, यजनानंद, आत्मबोधानंद, ब्रह्मचारी पूर्णानंद, डा. विजय वर्मा, व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष संजीव चौधरी, सिडकुल इकाई के अध्यक्ष रवि मिश्रा, प्रो. निरंजन देव, प्रो. डीएस भार्गव, प्रो. दिनेश भट्ट, दिनेश वालिया, प्रदीप कुमार, विनय कुमार, बीएन सिंह,अरुण भदोरिया, बलराम अरोड़ा, राधेश्याम अरोड़ा, सागर झा, विनय सेठी आदि ने स्वामी निगमानंद को श्रद्धासुमन अर्पित किए।