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स्थायी राजधानी के मुद्दे पर सरकार को घेरेगी उक्रांद

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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उत्तराखंड क्रांति दल की राष्ट्रीय कार्यसमिति में नगर निकाय चुनाव में हार की समीक्षा करने के साथ दल की मजबूती के लिए गहन मंथन किया। दल के पदाधिकारियों स्थायी राजधानी के साथ प्रदेश के गांवों को बसाने के साथ रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मजबूती के साथ आंदोलन करने पर जोर दिया।
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रविवार को शिवलोक स्थित कार्यालय पर उत्तराखंड क्रांति दल की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यसमिति में सबसे पहले नगर निकाय चुनाव में प्रदेश में हुई हार की समीक्षा की और अब सदस्यता अभियान चलाकर युवाओं के साथ सभी वर्ग के लोगों को दल से जोड़ने पर जोर दिया गया। उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट ने कहा कि प्रदेश में तीन हजार स्कूल बंद होने से रोजगार के साथ बच्चों की शिक्षा दूर हो गई है। गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की व्यवस्था न होने से पलायन लगातार बढ़ रहा है। गांव खाली हो गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सीमा अन्य देशों से सटी होने के चलते यहां की व्यवस्था सबसे मजबूत होनी चाहिए थी, लेकिन केंद्र सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने प्रदेश को पिछड़ा प्रदेश घोषित कराकर समुचित विकास योजना लागू कराने की मांग उठाई। संरक्षक पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी ने कहा कि उक्रांद के सदस्य अनुशासित होंगे और प्रदेश के अहम मुद्दों को उठाकर विकास कराने को केंद्र व राज्य सरकार को मजबूर कर देंगे। जिलाध्यक्ष राकेश राजपूत ने कहा कि प्रदेश की स्थायी राजधानी गैरसैंण को घोषित कराने के साथ अन्य मुद्दों को 25 दिसंबर को गैरसैंण में बैठक करेंगे और सरकार की बुद्धि शुद्धि को लेकर यज्ञ करेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एससी/एसटी एक्ट अध्यादेश लाकर देश को जातियों में बांटने का काम किया है, जिसे कतई बर्दास्त नहीं किया जाएगा। इस मौके पर पूर्व अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पंवार, दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष डीडी जोशी, चंद्रशेखर कापड़ी, किशन सिंह रावत, डीके पाल, रविंद्र वशिष्ठ, एमडी शर्मा, दीपक बौड़ाई, दीपक गौनियाल, धर्मेंद्र वशिष्ठ, शांति भट्ट, सुनील ध्यानी, चौधरी बृजपाल सिंह, जयंत अमोली आदि शामिल हुए।
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