ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
देहरादून। वन अनुसंधान संस्थान मेें आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता महासम्मेलन (आईबीसी-2018) का शनिवार को समापन हो गया। महासम्मेलन के समापन समारोह में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने जैव विविधता के खतराें से आगाह करते हुए कहा कि जैव विविधता के संरक्षण में देश दुनिया में उत्तराखंड का अमूल्य योगदान है जो राज्य के लिए गर्व की बात है।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि राज्य की समृद्ध जैव विविधता प्राचीन काल से पर्यटकों, दार्शनिकों, वैज्ञानिकों और संतों को आकर्षित करती रही है। इसका प्रभाव सामाजिक पारिस्थितिकीय तंत्र के साथ मठों, मंदिरों और तीर्थस्थलों के रूप में दिखाई देता है। देवभूमि की परंपराओं और संस्कृति की जडे़ं बहुत गहरी हैं और इनका जैव विविधता संरक्षण में प्राचीन काल से बहुत बड़ा योगदान रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रावत ने सिक्किम के सीएम पवन कुमार चामलिंग के जैविक हिमालय की परिकल्पना की सराहना की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
महासम्मेलन के विशिष्ट अतिथि सिक्किम के पूर्व राज्यपाल बीपी सिंह ने पारिस्थितिकीय सभ्यता (इकोलाजिकल सिविलाइजेशन) के निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैव विविधता संरक्षण के लिए विविधता में एकता की भारतीय अवधारणा बेहद कारगर साबित होगी। इससे पहले महासम्मेलन के तीसरे दिन दो वैज्ञानिक सत्रों का आयोजन किया गया। पहले सत्र में अमेरिका के जेवियर विवि के डॉ. जेम्स बुकानन बायो डायवर्सिटी एंड नॉलेज सिस्टम पर व्याख्यान दिया। इसके अलावा डॉ. इराच भरूचा, डॉ. कोन्नाड उबेलहोर जैसे विज्ञानियों ने सभी देशों में औपचारिक शिक्षा में जैव विविधता जैसे विषयों को शामिल करने पर जोर दिया।
दूसरे सत्र में ‘बायोडायवर्सिटी-क्लाइमेट चेंज और प्लेनेटरी हेल्थ पर व्याख्यान हुआ। इस दौरान डॉ. दीपक आप्टे, डॉ. सेजल बोहरा और डॉ. ए. बीजू कुमार ने तेजी से बदलती जलवायु व्यवस्था के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। महासम्मेलन के दौरान 60 शोध पत्र पढ़े गए। इससे पूर्व यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने मुख्यमंत्री समेत सभी अतिथियों व प्रतिनिधियों का स्वागत किया। वन अनुसंधान संस्थान की निदेशक डॉ. सविता ने आईबीसी-2018 की प्रमुख अनुशंषाएं प्रस्तुत कीं। आईबीसी की चेयरमैन डॉ. वंदना शिवा ने पारिस्थितिकीय सेवाओं और पृथ्वी मूल्यों के बाबत प्रकृति से सीख लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रकृति से सामंजस्य बिठाकर ही सुनहरे भविष्य की कल्पना की जा सकती है। समापन मौके पर डॉ. जीजी गंगाधरन, पद्मश्री प्रो. एके पुरोहित आदि उपस्थित रहे। ‘नवधान्य’ के कार्यकारी निदेशक डॉ. विनोद कुमार भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापित किया। महासम्मेलन के समापन राष्ट्रगान हुआ।
वहीं महासम्मेलन के दौरान आईबीसी की चेयरमैन डॉ. वंदना शिवा व कार्तिकेय शिवा की पुस्तक का विमोचन किया गया। साथ ही शोध पत्रों के सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतिकरण के लिए विजेता प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया।
नौनिहालों ने दिया जैव विविधता संरक्षण का संदेश
जैव विविधता महासम्मेलन के समापन पर वन अनुसंधान संस्थान के हरि सिंह ऑडिटोरियम में बच्चों के बीच जैव विविधता संरक्षण के प्रति रुचि और जागरूकता बढ़ाने के लिए जैव विविधता शिखर सम्मेलन का भी आयोजन किया। कार्यक्रम में राजधानी के कई स्कूलों के 100 बच्चों ने भाग लिया। इस दौरान बच्चों ने जैव विविधता संरक्षण का संकल्प लेने के साथ ही धरती को बचाने का संकल्प लिया।