ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
डीएवी कालेज में जीत का एनएसयूआई राष्ट्रीय अध्यक्ष फिरोज खान का सपना ‘गुटबाजी’ के सामने चकनाचूर हो गया। कांग्रेस की कोशिशें भी एनएसयूआई को डीएवी में जीत की राह पर नहीं ला पाई। नतीजे के तौर पर एनएसयूआई ने लगातार 12वीं हार का सामना किया।
एनएसयूआई ने इस साल डीएवी में आदित्य बिष्ट को अपना प्रत्याशी बनाया था। आदित्य, आर्यन छात्र संगठन के सक्रिय नेता था। इन्होंने कुछ दिन पहले ही एनएसयूआई का दामन थामा था। गत वर्ष जिस गुट के प्रत्याशी को टिकट मिला, इस साल दूसरे गुट की पसंद को टिकट दिया गया, लेकिन फिर हार सामने आई। एनएसयूआई का मैनेजमेंट पूरी तरह फेल साबित हुआ। एक ओर संगठन की गुटबाजी हावी साबित हुई तो दूसरी ओर कांग्रेस की रणनीति भी नाकाम साबित हुई। कांग्रेस ने बाकायदा भारी-भरकम नेताओं की टीम इस गुटबाजी को खत्म करने और डीएवी में 11 साल बाद जीत दर्ज करने की लालसा में लगाई तो लेकिन चुनाव से एक दिन पहले ही पूरी टीम ने घुटने टेक दिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को भी समझ आ गया कि डीएवी में एनएसयूआई की गुटबाजी से पार पाना अब आसान नहीं है। हाल के दिनों में एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिरोज खान ने करीब तीन बार देहरादून का दौरा किया। उन्होंने हर दौरे में अपनी प्राथमिकता में डीएवी की जीत रखी। गत माह तो उन्होंने यहां तक कह दिया था कि डीएवी की जीत मेरी झोली में डाल दो और मेरा दिल जीत लो।
अध्यक्ष प्रत्याशी को 1259, विवि प्रतिनिधि को 2578 वोट
डीएवी में एनएसयूआई के दो प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। इनमें से अध्यक्ष प्रत्याशी आदित्य बिष्ट को तो चुनाव में महज 1259 वोट मिले, जबकि विवि प्रतिनिधि प्रत्याशी अंजली चमोली को 2578 वोट मिले।