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2030 तक कीर्तिमान स्थापित करेगा भारत

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2030 तक कीर्तिमान स्थापित करेगा भारत
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। दुनिया में तेजी से बढ़ रहे पर्यावरण प्रदूषण के बीच लोगों के लिए यह खबर राहत देने वाली है। फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक वन क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी के साथ भारत न सिर्फ 10वें स्थान पर आ गया है। वरन वन क्षेत्रफल में वार्षिक बढ़ोत्तरी के मामले में भारत पूरी दुनिया में आठवें स्थान पर है। फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया में आयोजित चार दिवसीय ‘ग्लोबल फारेस्ट रिसोर्सेज असेसमेंट-2020’ सेमिनार में भारत समेत मध्य एशियाई देशों के कई देशों श्रीलंका, भूटान, नेपाल, सिंगापुर, बांग्लादेश के विशेषज्ञों ने वनों की वर्तमान स्थिति पर मंथन किया।
सेमिनार के पहले इन देशों के विशेषज्ञों के अलावा फूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन रोम से आए विशेषज्ञों ने इन देशों में वनों की वर्तमान स्थिति, वनों के क्षेत्रफल, बायोमास, वनों के विकास को लेकर इन देशों की सरकारों द्वारा अपनायी गई नीतियों पर मंथन किया।
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सेमिनार के दौरान यह निष्कर्ष निकला कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों मेें शामिल है जो कार्बन अवशोषण के मामले में अहम भूमिका निभा रहा है। एफएसआई की रिपोर्ट के मुताबिक जहां पूरी दुनिया में जंगल तेजी से कम हो रहे हैं वहीं भारत में वन क्षेत्रफल बढ़ रहा है। सन 2015 की एफआरए रिपोर्ट के मुताबिक वन क्षेत्रफल के मामले में भारत का स्थान पूरी दुनिया में 10वां है। जबकि वनों की वार्षिक वृद्धि के मामले में आठवां स्थान है।
इससे पूर्व आईसीएफआरई के निदेशक डॉ. एससी गैरोला ने चार दिवसीय सेमिनार का उद्घाटन किया। सेमिनार में एफएसआई के निदेशक सुभाष आशुतोष, भूटान के प्रतिनिधि लॉबजंग, बांग्लादेश के जहीर इकबाल, नेपाल के दीपक कुमार, सिंगापुर के हसन इब्राहिम, श्रीलंका के तिलक प्रेमकांत, भारत की ओर एफएसआई के उप निदेशक प्रकाश लखचौरा, एफएओ के प्रतिनिधि मोनिका व ओरियन ने अनुभव साझा किए।
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2030 तक भारत अवशोषित करेगा 2.523 बिलियन अतिरिक्त कार्बन
सेमिनार के दौरान विशेषज्ञों ने भारत के उन प्रयासों की सराहना की जिसमें पेरिस समझौते के तहत साल 2030 तक वातावरण से 2.523 बिलियन अतिरिक्त कार्बन अवशोषित करेगा। ऐसा होने से जहां ग्लोबल वार्मिंग के असर को कम किया जा सकेगा। वहीं पर्यावरण प्रदूषण को रोकने में मदद मिलेगी।
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हर पांच साल में होता है विश्वस्तरीय वनों का सर्वे
ग्लोबल फारेस्ट रिसोर्सेज असेसमेंट सर्वे हर पांच साल के बाद किया जाता है। 1946 में स्थापना के बाद एफएओ लगातार वनों को लेकर सर्वे करा रहा है। सन 1990 से भारतीय वन सर्वेक्षण इस वैश्विक अभियान का हिस्सा रहा है। दुनिया के हर देशों के प्रतिनिधि अपने-अपने देशों का डाटा एफएओ से साझा करते हैं। मार्च 2018 में राष्ट्रीय प्रतिनिधियों की वैश्विक बैठक के साथ एफआरए-2020 की आधिकारिक रिपोर्टिंग मेक्सिको की ओर से शुरू कर दी गई है।
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पाकिस्तान समेत तीन देशों के प्रतिनिधि नहीं पहुंचे
ग्लोबल फारेस्ट रिसोर्सेज असेसमेंट-2020 के सेमिनार में पाकिस्तान, ब्रुनेई समेत तीन देशों के प्रतिनिधि नहीं पहुंचे। हालांकि पहले इनके शामिल होने की सूचना दी गई थी लेकिन कतिपय कारणों के चलते नहीं आ पाए।
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