ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
एडीबी विंग की ओर से वाटर वर्क्स में चार करोड़ रुपये की लागत से तैयार कराए गए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को लेने से जल संस्थान ने इनकार कर दिया है। जल संस्थान का तर्क है कि उनके पास प्लांट में भरने के लिए पानी उपलब्ध नहीं है।
दिलाराम चौक स्थित जल संस्थान के वाटर वर्क्स में पहले से ही 22 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट है। जिसमें बांदल से 10 और बीजापुर स्त्रोत से प्रतिदिन आठ एमएलडी पानी आता है। उपलब्ध पानी से ज्यादा क्षमता का प्लांट होने के बावजूद एडीबी ने तीन साल पहले वाटर वर्क्स में साढ़े सात एमएलडी क्षमता का प्लांट बनाना शुरू किया। उस दौरान एडीबी का तर्क था कि मासीफॉल पेयजल योजना का जीर्णोद्धार कर वहां से पानी इस प्लांट में लाया जाएगा। 11 करोड़ की लागत से योजना पर काम भी किया गया, लेकिन पानी उपलब्ध न होने की वजह से लाइनें आज तक सूखी पड़ी हैं। वहीं, अब एडीबी की ओर से नए प्लांट को लेने के लिए पत्र भेजा गया है, प्लांट को लेने से जल संस्थान ने इनकार कर दिया है। इस संबंध में जल संस्थान की ओर से एडीबी को पत्र लिखकर अवगत करा दिया गया है। इस संबंध में एडीबी के प्रोजेक्ट मैनेजर विनय मिश्रा से बात करने के लिए कई बार फोन किया गया, मैसेज भी किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। भविष्य में उनका पक्ष आने पर हूबहू प्रकाशित किया जाएगा।
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कोट::
एडीबी की ओर से बनाए गए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में भरने के लिए हमारे पास पानी उपलब्ध नहीं है। गर्मियों में जलस्तर कम होने की वजह से वाटर वर्क्स में पहले से बने 22 एमएलडी क्षमता का प्लांट ही नहीं भर पा रहा है, तो नए प्लांट को लेने से क्या फायदा। क्योंकि इस प्लांट को प्रयोग करने के लिए निर्माण करने वाली कंपनी को संस्थान को पैसा भी देना पड़ेगा। इससे संस्थान पर अतिरिक्त वित्तीय भार बढ़ेगा। इसलिए प्लांट को लेने से इनकार कर दिया गया है।
मनीष सेमवाल, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान