ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
शिक्षा व्यवस्था सुधार में प्रधानाचार्यों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में शिक्षाविदों को नित नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रधानाचार्य केवल संस्था अध्यक्ष के रूप में नहीं बल्कि मार्गदर्शक के रूप में जिम्मेदारी निभाते हैं।
ऐसे ही तमाम अनुभव सोमवार को एसजीआरआर एजुकेशन मिशन के वार्षिक अधिवेशन में विभिन्न राज्यों से पहुंचे प्रधानाचार्यों ने साझा किए। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सीबीएसई के क्षेत्रीय अधिकारी रणबीर सिंह ने किया। इश दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी में श्री गुरु राम राय एजुकेशन मिशन और दरबार साहिब के योगदान की सराहना की। विशिष्ट अतिथि व एसजीआरआर एजुकेशन मिशन के उपाध्यक्ष डॉ. आरपी ध्यानी ने कहा कि विद्यालय के सर्वांगीण विकास में प्रधानाचार्य सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। मिशन के शिक्षा अधिकारी आरपी डोभाल ने कहा कि गुणवत्तापरक शिक्षा को लेकर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा एसजीआरआर एजुकेशन मिशन के शिक्षा अधिकारी विनय मोहन थपलियाल ने सीबीएसई से जुड़ी अहम जानकारियां साझा कीं। इसके बाद प्रधानाचार्यों ने प्रबंधन के सामने विद्यालयों से जुड़ी समस्याएं रखीं। अधिवेशन में डीपी ममगांई, एचपी भट्ट, राजेश अरोड़ा, वीना रावत, डॉ. राम नरेश सिंह समेत करीब 100 विद्यालयों के प्रधानाचार्य मौजूद रहे।