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टिहरी डूबण लग्यू चा रे बेटा...गीत ने झकझोरा

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टिहरी डूबण लग्यू चा रे बेटा...गीत ने झकझोरा
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-- अठूरवाला में गढ़वाली कवि सम्मेलन में टिहरी बांध के जलाशय में समाई यादों को किया ताजा
अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला। अठूरवाला में टिहरी महोत्सव के पहले दिन आयोजित लोकभाषा गढ़वाली कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने टिहरी बांध के जलाशय में समाई टिहरी की यादों को दोबारा ताजा कर दिया। कवियों ने अपनी रचनाओं में विस्थापन के दर्द, देश के विकास में टिहरी के जनमानस के बलिदान को उकेरा। इस दौरान बतौर मुख्य अतिथि सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भी अपनी गढ़वाली रचनाओं की पंक्तियां सुनाई। सम्मेलन में युवा कवि एवं गीतकार विशन सिंह चौहान ने ‘टिहरी डबूण लग्यू चा रे बेटा... गीत से टिहरी के इतिहास, बांध में समाए गांवों और संस्कृति को बयां कर लोगों की आंखों को नम किया। वरिष्ठ कवयित्री नीता कुकरेती ने ‘कैन सुपन्यों मा नि सोची होलू कभी टिहरी भी डूबी जाली’... रचना से पुरानी यादों को फिर से ताजा किया।
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कवि नरेंद्र रयाल ने हास्य व्यंग्य से ओतप्रोत कविता ‘हे भारत देश की सरकार’... से देश में पाकिस्तान परस्त आतंकवाद पर चुटीले अंदाज में एक नई घात जैंकार नामक फौज बनाने का सुझाव दिया। कवि सम्मेलन में हेमचंद्र रियाल ने ‘टिहरी तू डूबिगे’... कविता में बांध के जलाशय में एक संस्कृति और सभ्यता के डूब जाने का दर्द को बयां किया। रचनाकार धनेश कोठारी ने अपनी रचना ‘आखिर कै पर पोड़ि यू डाम’... में बांध निर्माण के दौरान चालाक लोगों की कारस्तानियों को उजागर किया। वरिष्ठ साहित्यकार देवेंद्र जोशी ने शहीदू का स्वीणा पूरा नि ह्वेनि... समेत विभिन्न क्षणिकाओं के जरिए पलायन के साथ ही राज्य की राजनीतिक स्थितियों पर ध्यान खींचा। इस दौरान कवि मलखीत रौथाण, विवेकानंद बहुगुणा ने भी काव्यपाठ किया।
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