ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में शुरू हुए तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि औषधीय पौधों में उत्तराखंड, देश का सबसे समृद्ध राज्य है। यहां मानव कल्याण में काम आने वाले औषधियों का खजाना छिपा है। ऐसे में इसका उचित दोहन और इसकी रक्षा करना हम सभी का दायित्व है।
बृहस्पतिवार से शुरू हुए सम्मेलन में एकेडमी ऑफ साइंटिफिक एंड इनोवेटिव रिसर्च के निदेशक डॉ. आरएस सांगवान ने कहा कि प्रकृति और मानव के सामंजस्य से ही समाज उन्नति कर सकता है। प्रकृति से मानवीय हस्तक्षेप कम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड औषधीय वनस्पतियों का खजाना है। यहां शोध की अपार संभावनाएं हैं। यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने बायो रिसोर्स के क्षेत्र में नीति एवं शोध के परिपेक्ष में अपने विचार रखे। अमेरिकन काउंसिल फॉर मेडिसिएली एक्टिव प्लांट के अध्यक्ष डॉ. जेफ्र ी एडिलबर्ग ने कहा कि भारत समृद्ध सांस्कृतिक देश है। यहां मानव कल्याण में काम आने वाले औषधियों का खजाना छिपा है। संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. एन जोशी ने छात्रों से आह्वान किया कि समाज को अपनाएं, उसका पोषण करें। संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉ. फेबरिको मिडिना बोलिवयो ने प्रेजेंटेशन देकर औषधियों के जरिए रोगों के उपचार पर प्रकाश डाला। उन्होंने मूंगफली के दानों में मौजूद रिसवरएटोल को कैंसर और ओबेसिटी के इलाज में फ ायदेमंद बताया। ग्राफिक एरा विवि के कुलाधिपति प्रो. आरसी जोशी ने कहा कि स्थानीय लोगों को पारंपरिक और औषधियों पौधों का ज्ञान होता है, शोधार्थी अपने शोध के लिए उनका सहयोग लें। कुलपति प्रो. राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि सम्मेलन में पहुंचे वैज्ञानिक और शोधार्थियों के प्रभूत ज्ञान और अनुभवों से छात्र-छात्राओं को लाभ उठाना चाहिए। इस अवसर पर ग्राफिक एरा पर्वतीय विवि के कुलपति प्रो. संजय जसोला, ग्राफिक एरा ग्रुप के अध्यक्ष प्रो. कमल घनशाला, अमेरिकी संस्थान के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस राव मेंटरेड्डी, डॉ. प्रोमिला शर्मा, डीआरडीओ की डायरेक्टर डॉ. मधुबाला ने भी अपने विचार रखे। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में देश-विदेश के 200 प्रतिनिधि, 80 संस्थाएं और 500 छात्र-छात्राएं शिरकत कर रहे हैं। इसमें 150 से ज्यादा शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।