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लोगों को एप की जानकारी ही नहीं, कैसे सुधरेगी रैंकिंग

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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दून के अधिकांश लोगों को स्वच्छता मोबाइल एप की जानकारी नहीं है। इसे डाउनलोड करने के लिए अभी तक कोई जागरूकता अभियान शुरू नहीं किया गया है। ऐसे में स्वच्छ सर्वेक्षण-2019 में हमारा प्रदर्शन कैसे बेहतर हो पाएगा। यह चिंता गति फाउंडेशन की ओर से स्वच्छ सर्वेक्षण-2019 पर जारी रिपोर्ट में जताई गई है।
बता दें, केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने वर्ष 2015 में राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ सर्वेक्षण की शुरुआत की थी। इस वर्ष का स्वच्छ सर्वेक्षण चार जनवरी से शुरू हो गया है, जो 31 जनवरी तक देशभर के विभिन्न शहरों और कस्बों में चलाया जा रहा है।
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गति फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष अनूप नौटियाल के अनुसार फाउंडेशन की रिपोर्ट में स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत पिछले वर्षों की अपेक्षा 2019 की योजनाओं और कार्यप्रणाली पर चर्चा की गई है। इस वर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए 5000 अंक तय किए गए हैं। बीते वर्षों तक 4000 अंक निर्धारित थे। इस वर्ष के सर्वेक्षण में तीन पुराने मानकों को शामिल किया गया है। इनमें सेवाओं में सुधार, सीधा निरीक्षण और जन भागीदारी शामिल है। वहीं, इस बार एक नया मानक शामिल किया गया है, यह है थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन, जो स्टार रेटिंग पर आधारित होगा। सभी चार मानकों में से प्रत्येक के लिए 1250 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा जनभागीदारी काफी महत्वपूर्ण रहेगा। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और उन्हें सफाई व्यवस्था में योगदान के लिए प्रेरित करना है।
नौटियाल के अनुसार स्टार रेटिंग की नई व्यवस्था बेहतरीन है। इससे शहरी निकाय स्वच्छता के लिए अधिक सजग होंगे। स्वच्छ सर्वेक्षण में शामिल उत्तराखंड के स्थानीय निकायों को अच्छी स्टार रेटिंग के लिए प्रयास करने होंगे। यह तभी होगा, जब संसाधनों में अधिक निवेश किया जाए और नागरिकों के साथ सामंजस्य स्थापित किया जाए।
गति फाउंडेशन के शोध में सामने आया कि पिछले दो संस्करणों में देहरादून का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। हालांकि, 2017 की तुलना में देहरादून ने 2018 में अपनी रैंकिंग में कुछ सुधार किया है। स्वच्छ सर्वेक्षण-2017 में दून को 316वीं तथा 2018 में 257वां स्थान मिला था। स्वच्छ सर्वेक्षण में उत्तराखंड में रुड़की का प्रदर्शन दून से बेहतर रहा। 2017 में रुड़की को 258वां और 2018 में 158 स्थान प्राप्त हुआ।
देश के सभी शहरों का होना है सर्वेक्षण
पहली देशभर में लागू स्वच्छता सर्वेक्षण-2016 में 73 शहरों को शामिल किया था। सर्वेक्षण 2017 में 434 व सर्वेक्षण 2018 में 4203 शहरों का सर्वेक्षण हुआ। इस बार के सर्वेक्षण में सभी शहरों को शामिल किया गया है।
1250 के चार भागों में 5000 अंकों में होगी रैंकिंग
इस बार 1250 अंकों के चार भागों में रैंकिंग दी जाएगी। स्वच्छता सर्वेक्षण 5000 अंकों का रखा गया है। इसमें प्राइवेट के साथ ही सरकारी कॉलोनियों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा प्रमाणीकरण का नया हिस्सा भी जोड़ा गया है। इसमें 20 प्रतिशत स्टाफ रेटिंग और पांच प्रतिशत ओडीएफ, ओडीएफ प्लस, ओडीएफ डबल प्लस का होगा। ऑनलाइन व्यवस्था के जरिये डिजिटल सर्वे होगा। सर्वेक्षण चार सेवा स्तर पर प्रगति, प्रत्यक्ष निगरानी, लोगों से प्राप्त फीडबैक और प्रमाणन के आधार पर होगा।
कचरा मुक्त शहरों के लिए स्टार रेटिंग की व्यवस्था
स्वच्छ सर्वेक्षण में शहरों को स्टार रेटिंग दी जाएगी। इसके लिए कचरा मुक्त शहरों के लिए स्टार रेटिंग में 12 मानकों के आधार पर जांच होगी। इसमें नालियों और जल स्रोतों की सफाई, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन, निर्माण-तोडफोड़ में निकले कचरे के निस्तारण व्यवस्था आदि को शामिल किया गया है। कचरा मुक्त शहर के लिए 1000, ओडीएफ को लेकर 250 अंक के आधार पर रेटिंग दी जाएगी। स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में चार घटक रखे गए हैं। इसमें प्रत्यक्ष अवलोकन 25, सेवा स्तर पर प्रगति 25, नागरिक प्रतिक्रया में 25 और अंत में प्रमाणीकरण 25 प्रतिशत हिस्सा होगा। इसके बाद सभी दस्तावेजों का स्वतंत्र संस्था के जरिये जांच की जाएगी।
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दून शहर का अन्य शहरों से तुलनात्मक रिपोर्ट
शहर रैंक सर्विस लेवल प्रोग्रेस डायरेक्ट आब्जर्वेशन सिटीजन फीडबैक ओवरऑल
पुणे 10वीं 1191/1400 1159/1200 1121/1400 3471/4000
मंगो 20वीं 696/1400 1162/1200 1303/1400 3161/4000
वर्धा 50वीं 568/1400 1105/1200 1201/1400 2874/4000
देहरादून 257वीं 140/1400 947/1200 761/1400 1847/4000
(नोट : गति फाउंडेशन की ओर से किया गया तुलनात्मक अध्ययन)
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इस वर्ष भी स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर हमारी तैयारियां पूरी हैं। पिछले सर्वेक्षण में जहां 12 से 13 हजार लोगों ने एप डाउनलोड किया। वहीं इस बार यह संख्या 80 हजार के ऊपर जा चुकी है। ऐसे में इस बार के सर्वेक्षण में हमारी रैंकिंग में और सुधार होने की संभावना है।
-डॉ. कैलाश जोशी, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम
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