ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
एमबीबीएस प्रथम वर्ष में ईयर बैक लगने से नाराज छात्रों ने सोमवार को दून मेडिकल कॉलेज परिसर में धरना दिया। देर रात तक छात्र विवि प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। रात करीब नौ बजे छात्रों से वार्ता करने के लिए प्राचार्य पहुंचे, लेकिन छात्र नहीं माने। खबर लिखे जाने तक छात्र खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे हुए थे।
दून मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस प्रथम वर्ष के 52 छात्र एनॉटमी की परीक्षा में फेल हो गए थे। इन छात्रों ने सप्लीमेंट्री एग्जाम दिया। इसके बाद भी इनमें से 40 छात्र फेल हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन छात्रों ने थ्योरी में 80 से 90 अंक हासिल किए हैं, वे भी प्रैक्टिकल में एक-एक अंक से फेल हैं। एमबीबीएस में पास होने के लिए थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों में 50-50 प्रतिशत अंक होने जरूरी हैं। छात्रों का कहना है कि प्रैक्टिकल में 60 में से 30 अंकों पर पास होते हैं, लेकिन उन्हें 27 से 29 अंक दिए गए हैं जबकि वे थ्योरी में अच्छे अंकों से पास हैं। देर रात धरने की जानकारी मिलने पर प्रभारी प्राचार्य डॉ. नवीन थपलियाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों को मनाने की कोशिश की। पूरी समस्या लिखित में देने की बात के साथ उन्हें धरना खत्म करने को कहा, लेकिन छात्र नहीं माने। देर रात तक दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन छात्रों को मनाने में जुटा था, लेकिन छात्र खुले आसमान के नीचे ठिठुरते हुए धरने पर बैठे रहे। छात्रों को डर है कि अगर विवि ने उन्हें मौका न दिया तो उनकी ईयर बैक लग जाएगी और पूरी पढ़ाई दोबारा करनी पड़ेगी।
एक शिक्षक पर लग रहे आरोप
मेडिकल के छात्रों ने एक शिक्षक पर जानबूझकर फेल करने का आरोप लगाया है। दरअसल, प्रैक्टिकल में पांच विशेषज्ञों का पैनल बैठता है। छात्रों का आरोप है कि एक शिक्षक ने जानबूझकर इस पैनल से छात्रों को फेल कराया है। यह आरोप इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि गत वर्ष भी इसी विषय में सबसे ज्यादा छात्र फेल हो गए थे।
धरने के लिए छात्रों ने मंगाए गद्दे
रातभर धरने पर बैठने के लिए छात्रों ने ठंड से बचाव का कुछ इंतजाम भी किया। इसके लिए स्थानीय स्तर से ही गद्दे मंगाए गए। रात करीब नौ बजे ही गद्दे पहुंच भी गए, लेकिन आसमान खुला होने से ठंड नहीं रुक पाई।
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कॉलेज प्रशासन की ओर से प्रैक्टिकल के जो अंक भेजे गए थे, उसी आधार पर रिजल्ट जारी किया गया है। हमने थ्योरी एग्जाम का केंद्रीयकृत मूल्यांकन कराया है। फिर भी अगर इतनी बड़ी संख्या में छात्र फेल हैं तो मामले की जांच कराने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-प्रो. विजय जुयाल, कुलसचिव, एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी