ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
देहरादून। अनजान चीज को जानना वैज्ञानिक दृष्टिकोण की ओर बढ़ना है, लेकिन जो हम देखते हैं क्या वह वास्तविक है। वहीं, गुरुत्वाकर्षण बल, एटम, इलेक्ट्रांस आदि दिखते नहीं हैं। क्या इनके होने पर कोई संदेह है। ऐसे ही कई मुद्दों पर बात करते हुए विज्ञान प्रसार संस्था केनिदेशक टीवी वेंकटेश्वरन ने लोगों में घर चुके मिथकों व अंध विश्वासों की परतों को खोलने की कोशिश की।
वेंकटेश्वरन रविवार को दून साइंस फोरम एवं अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से ‘मिथक एवं अंध विश्वास’ के संबंध में वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति एवं दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। कहा कि वैज्ञानिक सोच का व्यक्ति बगैर साक्ष्य के न तो किसी चीज को मानता है और तर्क नहीं होने के कारण उसका मजाक उड़ता है। इस दौरान अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के राज्य प्रमुख कैलाश कांडपाल, दून साइंस फोरम के डायरेक्टर एसके कुलश्रेष्ठ, विजय भट्ट, पहल संस्था से कमला पंत ने भी विचार रखे। सेमिनार का संचालन डॉ. प्रिया जायसवाल ने किया। इस अवसर पर होशियार सिंह पुंडीर, मनीषा रावत, जेपी कुकरेती, रीता बिष्ट, वीना गुलेरिया, ज्ञानानंद चमोली, सतीश सिंह, एसपी सेमवाल, डायट के निदेशक राकेश जुगरान आदि मौजूद रहे।