ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से आयोजित जीएसटी परिषद की 29 वीं बैठक में राज्य के वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने जीएसटी से एमएसएमई उद्यमियों को आने वाली समस्याओं को उठाया। उन्होंने डेढ़ करोड़ तक टर्नओवर वाले व्यापारियों को सीजीएसटी में 100 प्रतिशत और आईजीएसटी में 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रावधान करने की मांग रखी।
केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में हुई जीएसटी परिषद की बैठक में पंत ने एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर की समस्याओं को समाधान करने के लिए रखा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य में औद्योगिक पैकेज का लाभ लेने वाले उद्योगों को डीआईपीपी (औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग) की ओर से पूरा क्लेम नहीं मिला है। क्लेम राशि की कुल 837 करोड़ में से मात्र 314 करोड़ ही दिया गया। उन्होंने शीघ्र क्लेम की शेष राशि का भुगतान करने की मांग की। उन्होंने आइसक्रीम उद्योगों को भी समाधान स्कीम में लाने का सुझाव दिया। जीएसटी में आइसक्रीम इकाइयों के उद्यमियों को इस स्कीम से बाहर रखा है। वहीं, अनब्रांडेड नमकीन पर वर्तमान टैक्स स्लैब को 12 प्रतिशत से घटा 5 प्रतिशत किया जाए। इससे छोटे व्यापारियों को प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। आरबीआई में पंजीकृत सभी बैंकों में जीएसटी टैक्स जमा करने की सुविधा मिलनी चाहिए। अभी तक मात्र 14 बैंकों में टैक्स जमा करने सुविधा दी गई। पंत ने कहा कि जीएसटी की ऑनलाइन प्रक्रिया जटिल होने के कारण एमएसएमई सेक्टर के कई उद्यमी टैक्स रिटर्न फाइल नहीं कर पाए हैं। ऐसे उद्यमियों को वन टाइम सेटलमेंट के तहत विलंब शुल्क में छूट दी जाए। इसके साथ ही उन्होंने मांग रखी कि जीएसटी और इनकम टैक्स के ऑडिट रिपोर्ट को विलय किया जाए। जीएसटी कॉमन सेंटर में ऑफ लाइन मैनुअल रिटर्न दाखिल करने की सुविधा दी जानी चाहिए। उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की समस्या से व्यापारी समय पर ऑनलाइन रिटर्न फाइल नहीं कर पाते हैं। एमएसएमई द्वारा किए जा रहे जॉब वर्क के लिए राज्य के भीतर ई-वेे बिल के अनिवार्यता समाप्त की जाए। बैठक में आयुक्त्र राज्य कर सौजन्या, संयुक्त आयुक्त राकेश वर्मा भी मौजूद थे।