कोटद्वार। यमकेश्वर ब्लाक के दिबोगी और दयावाला गांव में 241 खैर के पेड़ों के अवैध कटान के मामले में लैंसडौन वन प्रभाग की लालढांग रेंज के दो अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। लैंसडौन वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी सौरभ सिंह ने दोनों अधिकारियों के निलंबन की संस्तुति शिवालिक वृत्त के वन संरक्षक को भेज दी है।
खैर के हरे पेड़ों अवैध रूप से चली आरी के मामले मेें डीएफओ ने विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता का अंदेशा जताते हुए मामले की जांच उप प्रभागीय वनाधिकारी जेसी बेलवाल को सौंपी थी। जांच में लालढांग रेंज में तैनात वन दरोगा धीरज सिंह रावत और मुख्यालय में तैनात डिपो अधिकारी जितेंद्र कुकरेती की पेड़ कटान के मामले में संलिप्तता सामने आई।
डीएफओ सौरभ सिंह ने बताया कि लालढांग रेंज के वन दरोगा रावत ने अपनी बीट में काटे गए खैर के पेड़ों की डाट की गिनती किए बिना ही डाटों से भरे ट्रक को निकासी दे दी, जबकि वन प्रभाग मुख्यालय के डिपो अधिकारी डिप्टी रेंजर जितेंद्र कुकरेती ने 25 जून को कार्यालय से जारी रवन्ने में डाटों से लदे ट्रक को कटान स्थान से कोटद्वार लाने की अनुमति तो जारी की, लेकिन ट्रक के कोटद्वार पहुंचे बिना ही 25 जून को ही एक अन्य रवन्ना जारी कर ट्रक को कोटद्वार से पांवटा साहिब जाने की अनुमति भी जारी कर दी। उन्होंने बताया कि पूरे मामले में दोनों कर्मियों की मिलीभगत सामने आई है। इसे देखते हुए निलंबन की संस्तुति वन संरक्षक को भेजी गई है।