ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राज्य के मातृ-शिशु मृत्यु दर के आंकड़ों को कम करने व प्रसूताओं-नवजातों के इलाज की बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए 18 अस्पतालों को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू ) के तौर पर उच्चीकृत किया गया है। इन एफआरयू में स्त्री रोग, बाल रोग, निश्चेतक समेत तमाम विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की गई है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्तमान में पूरे राज्य में 16 एफआरयू हैं। राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और इलाज की लचर व्यवस्थाओं के चलते सभी प्रसूताओं व नवजात बच्चों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पाती है। ऐसे में शासन व स्वास्थ्य निदेशालय ने राज्य में कई सीएचसी-पीएचसी व जिला अस्पतालों को एफआरयू के तौर पर विकसित करने का निर्णय लिया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम की निदेशक डॉ. अंजली नौटियाल ने बताया कि जिन अस्पतालों को एफआरयू के तौर पर विकसित किया गया है उनमें संयुक्त चिकित्सालय ऋषिकेश, संयुक्त चिकित्सालय प्रेमनगर, जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग, सीआरडब्ल्यू महिला अस्पताल हरिद्वार, जिला चिकित्सालय गोपेश्वर, सीएचसी कर्णप्रयाग, जिला अस्पताल बौराड़ी, बीएमजे जिला महिला अस्पताल अल्मोड़ा, महिला अस्पताल हल्द्वानी, संयुक्त चिकित्सालय रामनगर, जिला अस्पताल रुद्रपुर, एलडीबी काशीपुर, जिला अस्पताल चंपावत, गांधी शताब्दी चिकित्सालय देहरादून, एसडीएस टनकपुर, सीएचसी रायपुर देहरादून व सीएचसी विकासनगर देहरादून शामिल हैं। इन अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती भी की गई है। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग राज्य में 2020 तक मातृ-शिशु मृत्यु दर प्रति लाख प्रसव पर 30 तक लाने के लिए प्रयासरत है।