फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मौजूदा कानून किशोरों की सुरक्षा में सक्षम: पाठक

विज्ञापन
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन

किशोर न्याय अधिनियम के मौजूदा प्रावधान किशोरों को सुरक्षा देने में पूरी तरह सक्षम हैं। जानकारी के अभाव में कई बार पीड़ित को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। इसके लिए पीड़ित के साथ ही संबंधित अधिकारियों और इससे जुड़े लोगों को भी जानकारी होनी चाहिए।
शुक्रवार को बचपन बचाओ आंदोलन और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने किशोर न्याय से संबंधित विभागाें के साथ प्रशिक्षण का आयोजन किया। किशोर न्याय अधिनियम के प्रशिक्षक वरुण पाठक ने बताया कि मुश्किल में फंसे और विशेष जरूरत एवं देखभाल वाले बच्चों के लिए किशोर न्याय देखभाल एवं सुरक्षा अधिनियम-2015 लाभकारी है। बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि बाल संरक्षण अधिकार आयोग और बचपन बचाओ आंदोलन मिलकर राज्य में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा को कम करने के साथ ही पीड़ित बच्चों को जल्द न्याय दिलाना भी जरूरी है। इसके लिए आयोग न्याय पालिका के साथ बेहतर समन्वय बनाने की कोशिश कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

आयोग के पूर्व अध्यक्ष अजय सेतिया ने कहा कि कानून में संशोधन के बाद 14 से 18 साल तक के बच्चों के बड़े या खतरनाक उद्योग में काम करने को भी बाल मजदूरी उन्मूलन अधिनियम के तहत अपराध माना जाएगा। सेतिया ने कहा कि बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड के सामने किन परिस्थितियों में बच्चों को पेश किया जाता है, इसको लेकर कई बार पुलिस विभाग में मतभेद हो जाता है। लिहाजा विशेष जरूरत और देखरेख वाले बच्चों को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया जाए। कार्यक्रम में बाल आयोग की सदस्य शारदा त्रिपाठी, सीमा डोरा, बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यक्रम प्रबंधक मनीष शर्मा, राज्य समन्वय सुरेश उनियाल, पंकज कुमार, वरुण ओटारी, संदीप पंत, कामिनी शर्मा, प्रीति प्रियदर्शनी समेत अन्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें