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एक परिसर के अस्पतालों का होगा एकीकरण

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एक परिसर के अस्पतालों का होगा एकीकरण
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
विशेषज्ञ डॉक्टराें की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग ने अब निर्णय लिया है कि जहां जिला एवं महिला अस्पताल एक ही परिसर या आसपास हैं, उनका एकीकरण किया जाए। स्वास्थ्य सचिव ने इस संबंध में सभी सीएमओ से प्रस्ताव मांगा है। स्वास्थ्य सचिव नितेश झा ने बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य महानिदेशालय में सभी सीएमओ के साथ बैठक कर विजन-2020 की समीक्षा की।
समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने विजन-2020 को लेकर जिला स्तर पर किए जा रहे कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि इस विजन के तहत आठ प्रमुख योजनाओं के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इन योजनाओं के तहत सन् 2020 तक मातृ मृत्यु दर का आंकड़ा प्रति एक लाख प्रसव पर 100 और शिशु मृत्यु दर प्रति हजार पर 30 लाया जाना है। जबकि संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 90 फीसदी तक ले जाना है। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी 13 जिलों में ट्रॉमा सेंटर, ब्लड बैंक, आईसीयू संचालित करने और सभी परिवारों को स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ दिया जाना है।
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विजन-2020 के तहत राज्य के सभी गांवों व तोक के 10 किमी की परिधि में स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य सचिव ने हाल ही में तैनात किए गए नए चिकित्सकों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि बाल रोग, स्त्री रोग या हृदय रोग आदि के विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी चिंता का विषय है। इस समस्या को दूर करने के लिए उन सभी जिला और महिला अस्पतालों का एकीकरण किया जाए जो एक ही परिसर में हैं या आसपास है।
बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। मिशन निदेशक युगल किशोर पंत ने बताया कि गांव स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के विकास तथा पहुंच को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार 330 उप केंद्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित किए जाने का निर्णय लिया गया। इस कार्यक्रम के लिए बजट की स्वीकृति भी मिल चुकी है। मिशन निदेशक ने बताया कि हेल्थ एंड वेलनेस सेेंटर आधुनिक चिकित्सकीय सुविधाआें से लैस होंगे।
मिशन निदेशक ने आयुष्मान भारत योजना के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि योजना में आवासहीन, बेसहारा, दिव्यांग, भूमिहीन मजदूर, गरीब, अनुसूचित जाति/जनजाति, दुर्बल आय वर्ग इत्यादि ऐसे परिवार जो कि सामाजिक आर्थिक जनगणना 2011 की सूची में चिन्हित किए गए हैं, उनको पांच लाख रुपये तक की नि:शुल्क चिकित्सकीय सुविधा सूचीबद्ध सरकारी एवं निजी अस्पतालों के माध्यम से मुहैया करायी जाएगी। इसके अतिरिक्त राज्य में स्वास्थ्य योजनाओं के विधिवत क्रियान्वयन के लिए डाटा बेस तैयार किया जा रहा है। जिसके लिए उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट परियोजना की सहायता से सर्वे कार्य अगले माह शुरू होगा।
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बैठक में महानिदेशक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने सभी सीएमओ को निर्देश दिए कि वे अपने स्तर पर चिकित्सकों की तैनाती के लिए अधिकृत हैं। अस्पतालों में सामान्य और विषेशज्ञ चिकित्सकों की तैनाती का कार्य आगामी दिन में पूरा कर लें। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सभी निदेेशक, अपर निदेशक, संयुक्त निदेशक, सहायक निदेशक समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।
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