फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सस्ती किताबें पाकर अभिभावक हुए खुश

विज्ञापन
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
विज्ञापन

सूबे में नए सत्र से निजी सीबीएसई स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के सरकार के फैसले से अभिभावक खुश हैं। उनका कहना है कि गत वर्ष तक जिन किताबों के लिए वह दो हजार रुपये खर्च करते थे। इस साल वे महज 200 से 400 रुपये में ही आ गई हैं। हालांकि अभिभावकों का कहना है कि यह खुशी तभी पूरी होगी जबकि सरकार अपने एनसीईआरटी वाले फैसले पर कायम रहे।
बच्चोें की किताबें खरीदने पहुंचे अभिभावक का बृहस्पतिवार को अलग ही अंदाज देखने को मिला। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि जिन किताबों के लिए वह हर साल हजारों रुपये खर्च करते हैं। वे महज कुछ सौ रुपये में ही आ जाएंगी। आम नौकरी पेशा लोग तो सरकार के इस फैसले से बेहद खुश दिखे। उनका कहना था कि हर साल एडमिशन सीजन में सबसे ज्यादा चिंता बच्चों की महंगी किताबों के लिए पैसा जुटाने की होती थी, लेकिन इस बार किताबों पर महज 500 रुपये ही खर्च हुए। हालांकि खुशी के साथ अभिभावक सरकार के अपने फैसले से पलट जाने को लेकर आशंकित भी दिखे। अभिभावकों का कहना था कि किताबों की खरीद का पूरा अधिकार सरकार को अपने पास रखना चाहिए। अभिभावकों का कहना था कि उन्हें गत वर्षों के मुकाबले किताबें आठ गुना तक सस्ती मिली हैं।
विज्ञापन


अभिभावकों के बयान
---
सरकार के इस फैसले से हम बहुत खुश हैं। पहले जो किताबें 2000-3000 रुपये की मिलती थीं। वे अब महज 300 से 500 रुपये में मिल रही हैं। कहीं-कहीं किताबें कुछ कम हैं, लेकिन मध्य वर्ग के परिवाराें की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह फैसला आम आदमी के लिए बहुत लाभदायक रहेगा।
-दीपिका पंवार, अभिभावक
---
एनसीईआरटी किताबों के फैसले से निजी स्कूलों की मनमानी अब निश्चित रूप से बंद हो जाएगी। मैं एक मध्य वर्ग परिवार से हूं । इससे पहले बच्चे की किताबों की चार दोगुना पैसा लगता था, लेकिन शिक्षा के स्तर को सामान्य रखने के लिए जो सरकार ने एनसीईआरटी की अनिवार्यता का निर्णय लिया है वह सरहनीय है।
-जसवंत पंवार, अभिभावक
---
एनसीईआरटी को लेकर सरकार के फैसले से हम खुश हैं, लेकिन सरकार को भविष्य के लिए एनसीईआरटी का पैटर्न इस तरह तैयार करना होगा कि प्राइवेट पब्लिशर उसके सामने टिक न पाएं। सरकार अपने फैसले पर कायम रहेगी तो निश्चित तौर पर यह आम आदमी की जीत होगी।
-सीमा सिंह, अभिभावक

किताबों में अंतर से खर्च पर आठ गुना तक बचत
कक्षा एनसीईआरटी मूल्य प्राइवेट मूल्य
1 से 3 250-300 1700-2400
4 से 5 300-350 2500-3500
6 से 8 650-850 4600-6000
9 से 12 1050-1100 6500-8000
(मूल्य रुपये में)

----------------------------
-बाजार में कई विषयों की पुस्तकों की हुई शॉर्टेज
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
बाजार में एनसीईआरटी की पुस्तकें खूब बिक रही हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज दस दिन के भीतर से बाजार में कई विषयों की किताबों की किल्लत हो गई है। इसमें कई मुख्य विषय शामिल हैं। अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि बाजार से यह किल्लत तत्काल दूर कराई जाए ताकि कल उनके बच्चे की पढ़ाई का नुकसान न हो।
विज्ञापन

इस साल सरकार ने निजी सीबीएसई स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाने का आदेश जारी किया है। इस आदेश पर निजी स्कूलों के विरोध के बीच अभिभावकों ने किताबें खरीदनी शुरू कर दी हैं। कुछ स्कूलों के विरोध के स्वर भी ठंडे होेने लगे हैं तो उन्होंने अभिभावकों को एनसीईआरटी की किताबें खरीदने की सूचना भेज दी है। बाजार में तेजी से बिक रहीं इन किताबों में कई विषयों की किताबों की किल्लत होने लगी है। बृहस्पतिवार को कक्षा छह की साइंस, मैथ्स, हिस्ट्री की किताबों के लिए अभिभावक भटकते मिले। इसके अलावा कई और कक्षाओं की किताबों की शॉर्टेज है। पुस्तक विक्रेता कुलदीप शर्मा का कहना है कि बाजार में डिमांड के हिसाब से एनसीईआरटी किताबों की किल्लत तो है, लेकिन दो से चार दिन के भीतर ये किताबें उपलब्ध हो जाएंगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें