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सरकार और निजी स्कूलों के बीच फंसे अभिभावक

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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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सरकार और निजी स्कूलों के बीच की तनातनी में अभिभावक फंस गए हैं। सरकार ने कहा है कि प्राइवेट किताबें नहीं पढ़ाई जाएंगी तो आंदोलन कर रहे निजी स्कूलों ने अभिभावकों को प्राइवेट किताबों की सूची पकड़ा दी है। अब अभिभावकों को यह चिंता है कि अगर सरकार ने अपना फैसला न बदला तो इतनी महंगी प्राइवेट किताबें वह कहां लेकर जाएंगे। क्योंकि बुक सेलर भी इन्हें वापस नहीं लेंगे।
बृहस्पतिवार से प्रदेशभर के सीबीएसई स्कूलों ने सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। उधर, स्कूल संचालक गांधी पार्क में एकजुट होकर धरना दे रहे थे तो इधर बुक सेलर की दुकानों पर अभिभावक किताबों की खरीदारी में पसीना बहा रहे थे। अमर उजाला ने मौके पर जाकर किताबें खरीदने आए अभिभावकों का पक्ष जाना तो वह बेहद असमंजस में नजर आए। उनका कहना था कि सबसे मुश्किल यह है कि वह किताबें खरीदें या नहीं। अभी तक सरकार का रुख पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि प्राइवेट किताबें पढ़ाई जाएंगी या नहीं। ऐसे में वह किताबें लेने तो आ गए लेकिन इतनी महंगी प्राइवेट किताबें खरीदकर अगर नहीं चली तो क्या होगा। अभिभावकों का यह भी कहना था कि भले ही सरकार ने आदेश जारी किए हों कि केवल एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाएंगी लेकिन स्कूलों ने इस बीच ही हर साल की तरह इस साल भी निजी स्कूलों ने प्राईवेट किताबों की सूची ही दे दी है। एनसीईआरटी की पुस्तकें बाजार में उपलब्ध हैं लेकिन चुनिंदा दुकानों पर। इस वजह से इन दुकानों पर भी अभिभावकों की भीड़ लगी हुई है।
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एनसीईआरटी की किताबें बाजार में उपलब्ध हैं। हमें कोई परेशानी नहीं हैं। सरकार की ओर से कुछ समय पहले ही एनसीईआरटी किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। जिन अभिभावकों को यह किताबें चाहिए, वह संपर्क कर सकते हैं।
- सुधीर कुमार, बुक सेलर, डिस्पेंसरी रोड
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अभिभावकों के बयान, फोटो के साथ
सरकार एक तरफ तो एनसीईआरटी की अनिवार्यता की बात करती है लेेकिन रिजल्ट आउट होते ही निजी स्कूलों ने किताबों का चिट्ठा दे दिया है। हमें परेशानी यह आ रही है कि अगर सरकार और निजी स्कूल संचालक की बात नहीं बनती तो खरीदी गई किताबाें का क्या होगा?
-यशपाल राणा, अभिभावक
वैसे तो हमारे शिक्षा मंत्री सीना तान कर बोलते हैं कि एनसीईआरटी किताबें बाजार में उपलब्ध हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं देखने को मिल रहा है। सिर्फ गिने-चुने बुक सेलरों के पास ही एनसीईआरटी की पुस्तकें हैं। इसलिए अभिभावकों को दिनभर चक्कर काटने पड़े रहे हैं।
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-आरती गुरुंग, अभिभावक
हम तो सरकार और निजी स्कूलों के बीच में फंसे हुए हैं। सरकार को जल्द स्थिति साफ करनी चाहिए कि प्राइवेट किताबें लेनी हैं या नहीं। अगर कहीं सरकार ने फैसला वापस ले लिया तो हम यह किताबें कहां लेकर जाएंगे। -विजय प्रकाश गुप्ता, अभिभावक
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