चंबा (टिहरी)। औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के रानीचौरी परिसर में फसलों को कीटों से बचाने के लिए विचार गोष्ठी आयोजित की गई। वक्ताओं ने किसानों को मौसम चक्र के अनुरूप खेती करने और कीट से बचाव के लिए बार-बार पौधों की निगरानी करने का सुझाव दिया।
भारतीय शोध परियोजना की पहल पर कुरमुला कीट से फसलों के बचाव के लिए सोमवार को रानीचौरी परिसर में विशेषज्ञों की विचार गोष्ठी आयोजित की गई। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एडीजी डा. पीके चक्रवर्ती और डा. आईएस सोलंकी ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। डा. चक्रवती ने कहा कि फसलों को सबसे ज्यादा खतरा कीटों से होता है। मिट्टी के कीट फसल को नुकसान पहुंचा कर पूरे इको सिस्टम को प्रभावित करते हैं। कहा कि फसलों को कीट से बचाने के लिए किसानों को समय-समय पर मृदा परीक्षण भी करना चाहिए। बदलते मौसम चक्र के अनुसार बगानी और खेती के तौर तरीके भी बदलने की जरूरत है। इस मौके पर वानिकी महाविद्यालय के डीन प्रो. सीएम शर्मा, परियोजना अधिकारी डा. लक्ष्मी रावत, डा. अशोक भटनागर, डा. वेद प्रकाश कोठारी, डा. डीबी आहूजा आदि उपस्थित रहे।