राज्य में खुलेगा उत्तराखंड पावर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। बिजली विभाग के अधिकारी, अभियंता व कर्मचारी ऊर्जा के क्षेत्र में आधुनिकतम जानकारियों से रूबरू हों, इसके लिए महाराष्ट्र व गुजरात की तर्ज पर उत्तराखंड में भी ‘पावर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोला जाएगा। राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष सुभाष कुमार की अध्यक्षता में ऊर्जा विभाग के तीनों निगमों के प्रबंध निदेशकों के साथ हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। इतना ही नहीं उत्तराखंड पावर इंस्टीट्यूट की संरचना व ढांचे के गठन को लेकर उच्च स्तरीय कमेटी का गठन भी कर दिया गया है जो एनटीपीसी जैसे संस्थानों का अध्ययन कर तमाम पहलुओं पर रिपोर्ट सौंपेगी।
बैठक में आयोग अध्यक्ष सुभाष कुमार ने कहा कि तेजी से बदलते दौर में अभियंताओं व कर्मचारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण देकर आधुनिक टेक्नोलॉजी व कानूनों की जानकारी देने की जरूरत है। इसके लिए राज्य में एक स्वतंत्र एवं स्वचालित विद्युत प्रशिक्षण संस्थान की जरूरत है। बैठक के दौरान तीनों निगमों के प्रबंध निदेशकों ने भी संस्थान की स्थापना एवं उसके संरचना से संबधित विषयों पर अपने सुझाव दिए। सहमति बनी कि यह संस्थान राजधानी के आसपास बनाया जाए ताकि लोग आसानी से आ जा सके।
यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा ने कहा कि प्रशिक्षण संस्थान के लिए यूपीसीएल की ओर से जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। बैठक मेें आयोग सचिव नीरज सती, निदेशक (वित्त) दीपक पांडे, उपनिदेशक (तकनीकी) यशवर्धन डिमरी, यूपीसीएल प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा, निदेशक यूजेवीएनएल एसएन वर्मा, पिटकुल प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल, डॉ. अविनाश जोशी, आशीष कुमार निदेशक समेत तीनों निगमों के कई अधिकारी उपस्थित थे।
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आयोग के साथ ही तीनों निगम मुहैया कराएंगे बजट
बैठक में सहमति बनी कि शुरुआती दौर में पावर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के निर्माण व उसके अधिकारियों, कर्मचारियों के वेतन के लिए बजट तीनों निगमों के साथ ही आयोग द्वारा मुहैया कराया जाएगा। बाद में संस्थान द्वारा खुद ही बजट का प्रावधान किया जाएगा। संस्थान में राज्य के अलावा अन्य राज्यों के अभियंताओं व कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
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राज्य सरकार का नहीं होगा दखल
संस्थान एक स्वायत्तशासी संस्था होगी और इसमें राज्य सरकार का कोई दखल नहीं होगा। स्वायत्तशासी संस्था बनाने का मकसद यह है कि संस्थान अपने तरीके से काम कर सके।