निविदा शर्तों के विपरीत कंपनी को दे दिया करोड़ों का ठेका
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पिथौरागढ़ में आंवलाघाट पेयजल पंपिंग पेयजल योजना में आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। आंवलाघाट पंपिंग पेयजल योजना में गड़बड़ियां उजागर होने के बाद अब यह बात सामने आ रही है कि पेयजल निगम के आला अफसरों ने निविदा शर्तों को दरकिनार करते हुए ऐसी कंपनी को निर्माण कार्य का जिम्मा सौंप दिया, जिसके पास बड़ी पेयजल योजनाओं का कोई अनुभव ही नहीं था। प्रकरण से पेयजल मंत्री प्रकाश पंत को शिकायत दर्ज कराने के साथ ही सचिव पेयजल, अध्यक्ष उत्तराखंड पेयजल निगम को भी शिकायत दर्ज करायी गई है।
देहरादून के इंद्रपुरी रोड निवासी ऋषभ राय की ओर से पेयजल मंत्री को दर्ज करायी शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 40 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना का निर्माण ऐसी कंपनी को सौंप दिया गया जिसके पास बड़ी पेयजल योजनाएं बनाने का अनुभव ही नहीं था। साथ ही ठेका आवंटित होते समय कंपनी का पेयजल जलापूर्ति में पंजीकरण तक नही था। जबकि निविदा शर्तों के मुताबिक ऐसा होना अनिवार्य था। इतना ही नहीं पेयजल मंत्री से की ग्रइ शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिस विभागीय अधिकारी ने डीडीहाट पंपिंग योजना में पांच करोड़ के कार्य के लिए कंपनी को अयोग्य पाया था और उस कंपनी को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। उसी कंपनी पर महरबान आला अफसरों ने 40 करोड़ की लागत वाली पेयजल योजना के निर्माण का जिम्मा सौंप दिया। शिकायत में कहा गया है कि जिस अधिकारी ने अयोग्य कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाया और उसके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पुरस्कृत किया था, उसे ही आरोप पत्र जारी कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण में पेयजल निगम के आला अफसरों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
खास बात यह है कि जिन पेयजल परियोजना को लेकर निर्माण कंपनी व आला विभागीय अफसरों पर मिलीभगत के आरोप लगाए गए हैं, वह परियोजना पेयजल मंत्री के गृह जनपद से भी जुड़ी है और विभागीय मंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है। दूसरी ओर शिकायतों के संबंध में प्रबंध निदेशक भजन सिंह से जानकारी ली गई तो संपर्क नही हो सका। उनका पक्ष मिलने के साथ ही उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।