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विलुप्तप्राय जीवों को बचाने में जुटे वैज्ञानिक

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विलुप्तप्राय जीवों को बचाने में जुटे वैज्ञानिक
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। देश में गैंगेटिक डाल्फिन, डुंगाग, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड व संगाई होने की कगार पर हैं। ऐसे में भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के वैज्ञानिकों की टीम इनके संरक्षण को लेकर जुट गई है। वन्यजीव संस्थान की ओर से दुर्लभ प्रजाति के इन जीव जंतुओं व पक्षियों को बचाने के लिए कार्य योजना बनाई गई है। साथ ही तमाम इलाकों में इनके संरक्षण को लेकर अभियान भी तेज कर दिया गया है। दुर्लभ प्रजाति के इन जीव जंतुओं के संरक्षण में बजट की कमी न हो इसके लिए केंद्र सरकार की कैंपा परियोजना के तहत बजट मुहैया कराया गया है। इन जीवों को बचाने के लिए सेना, राज्य सरकारों और स्थानीय लोगों की भी मदद ली जा रही है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से आयोजित 14वें वार्षिक रिसर्च सेमिनार में मंगलवार को यह रिपोर्ट पेश की गई। विज्ञानियों ने गैंगेटिक डॉल्फिन, डुगांग (समुद्री सांप), ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और संगाई (मणिपुरी हिरण) के संरक्षण को लेकर रिपोर्ट पेश की। प्रोजेक्ट के वैज्ञानिक डॉक्टर राशिद एच रजा ने सेमिनार के दौरान बताया कि गंगा नदी में डॉल्फिन तेजी से विलुप्त हो रही हैं। अगर इनके संरक्षण को लेकर समय रहते कारगर कदम नहीं उठाए गए वह दिन दूर नहीं जब डॉल्फिन गंगा समेत देश की तमाम नदियों से विलुप्त हो जाएंगी। वही वन्य जीव विज्ञानी डॉ. आनंद पांडे ने डुगांग के संरक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी।
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वन्यजीव विज्ञानी डॉ. चोंगपाई तुबोई ने मणिपुर में पाए जाने वाले संगाई (मणिपुरी हिरण) के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे के बारे में जानकारी दी। डॉ. तुबोई ने बताया कि ‘डांसिंग डीयर’ के नाम से मशहूर दुर्लभ हिरण के संरक्षण को लेकर कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वहीं संस्थान के वन्यजीव विज्ञानी डॉ. सुतीर्थ दत्ता ने ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ पर मंडरा रहे खतरे पर प्रकाश डाला।
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तीनों सेनाओं की ली जा रही मदद
भारतीय वन्यजीव संस्थान के विज्ञानियों ने बताया कि इन सभी चारों प्रजातियों के वन्यजीवों, जलीय जीवों को बचाने के लिए न केवल भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों बल्कि तीनों सेनाओं के साथ ही राज्य सरकारों की भी मदद ली जा रही है। समुद्री सांप को बचाने के लिए नौ सेना और कोस्ट गार्ड की मदद ली जा रही है।


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