ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
राजकीय शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने 31 जुलाई से शिक्षा निदेशालय में चल रहा आमरण अनशन बृहस्पतिवार को समाप्त कर दिया है। आर-पार की लडाई का एलान करने वाले शिक्षक नेता आज नरम मुद्रा में नजर आए। उन्होंने कहा कि सरकार ने हमारी कुछ मांगें मानने का आश्वासन दिया है। कोर्ट की भावना का सम्मान करते हुए संघ की कोर समिति ने अनशन खत्म करने का निर्णय लिया है। शिक्षामंत्री अरविंद पांडेय ने शिक्षक नेताओं के इस फैसले पर आभार व्यक्त करते हुए, उनकी जायज मांगें मानने का वायदा दोहराया।
अनशन वापसी के इस फैसले का माहौल बृहस्पतिवार दोपहर उस वक्त बनने लगा, जब शिक्षक नेताओं को खबर मिली कि हाईकोर्ट इस मामले में सख्त फैसला सुना सकता है। उस वक्त तक शिक्षा निदेशालय में संघ के उपाध्यक्ष मुकेश बहुगुणा और संयुक्त मंत्री योगेश घिल्डियाल आमरण अनशन पर डटे हुए थे। खबर मिलने के कुछ ही देर बाद शिक्षक संघ कोर समिति ने बैठक की। इसमें आमरण अनशन समाप्त करने का फैसला लिया गया।
शिक्षक नेताओं ने कहा कि संघ के केवल कुछ पदाधिकारी ही इस आंदोलन में शामिल रहे, जिसे लेकर हाईकोर्ट में गलत जानकारी दी गई। हकीकत में इस दौरान न तो किसी विद्यालय में तालाबंदी हुई और न ही पढ़ाई पर असर पड़ा। कोर कमेटी के फैसले के मुताबिक दोपहर करीब तीन बजे संघ के अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी और महामंत्री डॉ. सोहन सिंह माझिला ने अनशन खत्म करने की औपचारिक घोषणा कर दी। उन्होंने आंदोलन में नैतिक समर्थन देने के लिए सभी शिक्षकों का आभार जताया। इस अवसर पर कोषाध्यक्ष अनुज चौधरी, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष रविंद्र सिंह राणा समेत अन्य शिक्षक नेता मौजूद रहे।
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शिक्षा सचिव डॉ. भूपिंदर कौर औलख से हमारी वार्ता हुई है। उन्होंने शिक्षकों की कुछ मांगों पर जल्द शासनादेश जारी करने का आश्वासन दिया है। हाईकोर्ट की भावना का सम्मान करते हुए राजकीय शिक्षक संघ ने आमरण अनशन समाप्त कर दिया है।
-डॉ. सोहन सिंह माझिला, महामंत्री, राजकीय शिक्षक संघ
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शिक्षकों की सभी जायज मांगें पूरी की जाएंगी। अब शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में जाकर पठन पाठन व्यवस्था को सुचारु करने का काम करें। आंदोलन समाप्त करने के लिए मैं शिक्षकों का धन्यवाद करता हूं।
-अरविंद पांडेय, शिक्षा मंत्री