ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
प्रदेश में अब सभी अल्ट्रासाउंड मशीनों पर एक्टिव ट्रैकर लगाए जाएंगे। इसके माध्यम से सभी अल्ट्राउंड का ब्योरा सुरक्षित रखा जाएगा। इसके अलावा गर्भपात के प्रत्येक मामले का ऑडिट भी किया जाएगा। घटते लिंगानुपात को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने यह निर्णय लिया है। साथ ही गर्भपात की दवाएं अब केवल चिकित्सक के परामर्श पर ही मिलेंगी। मेडिकल स्टोर पर भी गर्भपात की दवा की बिक्री प्रतिबंधित होगी।
मंगलवार को पीसीपीएनडीटी (गर्भ धारण एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक-विनियमन तथा दुरुपयोग) अधिनियम की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में इस पर सहमति बनी। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि गर्भपात की दवा केवल चिकित्सक के परामर्श के बाद ही बेची जानी चाहिए। स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास गर्भपात के लिए जाने वाली प्रत्येक महिला की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और संबंधित रेडियोलॉजिस्ट की जानकारी अवश्य रखी जाए। उन्होंने कहा कि सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के निदेशक डॉ. अजली नौटियाल ने गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण के लिए एएनएम को जिम्मेदारी सौंपने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि केंद्र सरकार के स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) पोर्टल पर सभी गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण अनिवार्य रूप से किया जाए ताकि उन पर पूरी निगरानी रखी जा सके। राज्य नोडल अधिकारी डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि मशीन के साथ लगने वाले एक्टिव ट्रैकर में अल्ट्रासाउंड से जुड़ी सभी जानकारी रिकॉर्ड रहेगी। समीक्षा बैठक में आईएमए अध्यक्ष डॉ. सुमन सेठी, डॉ. लूना पंत समेत अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।