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जहन्नुम की आग से निजात का तीसरा अशरा शुरू

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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
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रमजानुल मुबारक का जहन्नुम से निजात का तीसरा अशरा मंगलवार शाम से शुरू हो गया। 20वें रोजे को दूसरा अशरा खत्म हो गया। उलमा के अनुसार तीसरे अशरे में खुदा की इबादत करने वालों को जहन्नुम की आग से निजात मिलती है।
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शहर मुफ्ती मोहम्मद सलीम अहमद ने बताया कि वैसे तो रमजान का पूरा महीना ही रहमतों का महीना है। लेकिन सबसे अहम है तीसरा अशरा। क्योंकि इसी अशरे की पाक रातों में यानी 21, 23, 25, 27, 29 रमजान की रात पाक कुरान शरीफ नाजिल हुई थी। इन रातों में से जिस रात को कुरान शरीफ नाजिल हुई, उसे शबे कद्र की रात कहते हैं। इसलिए इन रातों की अहमियत काफी बढ़ जाती है। शबे कद्र की रात को हजार महीने की रातों के बराबर बताया गया है। लेकिन वह कौन सी रात है, किस रात को कुरान शरीफ नाजिल हुई, यह ठीक-ठीक मालूम नहीं है। इसलिए रोजेदार इन पांचों रात को जागकर खुदावंद करीम की इबादत करते हैं। रमजान के तीसरे अशरे में ही फितरा और जकात भी अदा की जाती है। जिससे ईद की नमाज गरीब लोग भी खुशी से पढ़ सकें। वैसे ईद के बाद भी फितरा और जकात निकाला जा सकता है, लेकिन रमजान में ही यह निकालना बेहतर होता है।
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