ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
तबादले बहाल करने की मांग को लेकर घेराव करने पहुंचे शिक्षकों को शिक्षा सचिव डॉ. भूपिंदर कौर औलख ने जमकर लताड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार ने तबादले निरस्त करने का फैसला लिया है, जिसे किसी भी कीमत पर नहीं बदला जाएगा। जिन शिक्षकों को दिक्कत है, वह चाहें तो नौकरी छोड़ सकते हैं।
इससे पहले मंगलवार को शिक्षा निदेशालय में धरना देते हुए शिक्षकों ने कहा कि पिछले वर्ष रिक्त पदों के सापेक्ष विधिवत रूप से उनका तबादला किया गया था। ज्यादातर शिक्षकों का तबादला पहाड़ से पहाड़ और दुर्गम से दुर्गम में ही किया गया था। लेकिन मौजूदा सरकार ने बिना किसी वजह उनका तबादला निरस्त कर दिया है। साथ ही उन्हें वापस मूल तैनाती पर भेजने की बात की जा रही है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर शिक्षकों का तबादला बीमारी और अन्य पारिवारिक कठिनाइयों के चलते किया गया था। ऐसे में उनके तबादले को निरस्त किया जाना किसी भी तरह ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री से भी मुलाकात कर चुके हैं। उन्हें दोनों जगह से सकारात्मक आश्वासन मिला है लेकिन अब तक कुछ नहीं हो पाया है। इसके बाद शिक्षक बैठक लेने पहुंची शिक्षा सचिव डॉ. भूपिंदर कौर औलख का घेराव करने पहुंचे। शिक्षकों ने जैसे ही मौजूदा आदेश को निरस्त कर तबादले बहाल करने की मांग की डॉ. औलख नाराज हो गईं। उन्होंने फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार किसी भी कीमत पर निरस्त तबादलों को बहाल नहीं करेगी। धरना-प्रदर्शन करने वालों में अध्यक्ष वीरेंद्र्र भंडारी, महामंत्री भूपेंद्र बिष्ट, भवानी प्रसाद बिजल्वाण, राजेश्वरी पैन्यूली, मधुसूदन, राकेश प्रसाद नौटियाल, सुमन रावत, मनोरमा सजवाण, उषा गौड़ समेत कई अन्य शिक्षक मौजूद रहे।