नई टिहरी। घुत्तू-पवांली कांठा रोप-वे सात साल से अधर में लटका है, जिससे ग्रामीण अपनी नकदी फसल बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। वहीं पवांली-कांठा से वन गुर्जरों का दूध आंचल डेरी तक पहुंचाने की योजना भी परवान नहीं चढ़ पाई है। निर्माण कार्य समय पर नहीं होने से एक करोड़ तीन लाख रुपये में बनने वाले चार किमी रोप-वे की लागत बढ़ना तय है।
गर्मियों के मौसम में दूध की कमी से जूझ रही आंचल डेरी को सड़क से 14 किमी पैदल पंवाली-कांठा से वन गुर्जरों का करीब चार हजार लीटर दूध डेरी तक पहुंचाने और सड़क से दूर गांवों का उत्पाद को बाजार उपलब्ध कराने की मंशा से मंडी परिषद ने वर्ष 2011 में घुत्तू से पंवाली-कांठा तक 1.3 करोड़ की लागत से चार किमी रोप-वे का निर्माण शुरू कराया था। कार्य शुरू होने के सालभर बाद ही 80 लाख खर्च कर 17 सौ मीटर रोप-वे बनाने के बाद परिषद ने निर्माण बंद कर दिया, लेकिन इन छह सालों में कोई रोप-वे की सुध नहीं ले रहा है। इससे चार-पांच माह पंवाली-कांठा में प्रवास करने वाले गुर्जरों की भैंसों का दूध आंचल डेरी को नहीं मिल पा रहा है। वहीं ग्रामीणों को भी चार-पांच किमी पैदल घुत्तू पहुंचना पड़ रहा है। 14 किमी दूर पंवाली से गुर्जर भी अपना दूध घुत्तू नहीं पहुंचा रहे हैं। रोप-वे से पंवाली से आधे घंटे में घुत्तू पहुंचा जा सकता है।
कोट
फॉरेस्ट की एनओसी नहीं मिलने से निर्माण रोकना पड़ा था। अब एनओसी मिल गई है। अब फिर से इस्टीमेट बनाने के बाद कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। रोप-वे बनने के बाद ग्राम पंचायत के हैंडओवर किया जाएगा।
- अनिल सैनी, उप महाप्रबंधक मंडी परिषद देहरादून।
गर्मियों में पंवाली से वन गुर्जरों का दूध आंचल डेरी तक पहुंचाने के उद्देश्य से रोप-वे स्वीकृत कराया गया था, लेकिन इतने सालों बाद भी कार्य पूरा नहीं हुआ है। मंडी परिषद को निर्माण कार्य जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
- धन सिंह नेगी, विधायक टिहरी।